इससे काशी और प्रयागराज जैसे धार्मिक-सांस्कृतिक नगरों के मध्य स्थित इस सैंडविच जिले की हरियाली बेनूर हो गई है। यहां पेड़-पौधों की संख्या गिनती की होकर रह गई है। फॉरेस्ट सर्वे रिपोर्ट-2019 के मुताबिक 1015 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाले भदोही में ट्री कवर एरिया महज 3.12 वर्ग किमी है। यहां वन क्षेत्र है ही नहीं। इससे जिले में पौधरोपण अभियानों की सफलता का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। जब हरियाली ही नहीं रहेगी तो धरती की सुरक्षा का आधार क्या रहेगा।
देखरेख के अभाव में सूखते हैं पौधे: डीएफओ
भदोही के प्रभागीय वनाधिकारी आलोक सक्सेना कहते हैं कि पौधरोपण अभियान में अलग-अलग विभागों को पौधरोपण की जिम्मेदारी दी जाती है। अपने विभाग की तरफ से मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि वन विभाग जो पौधे लगाता है, उनमें से ज्यादातर पौधे बचे रहते हैं। मगर दूसरे विभागों की ओर से कराए गए पौधरोपण के बचने की गारंटी नहीं रहती। क्योंकि वह केवल पौधरोपण कर भूल जाते हैं। जबकि पौधों की देख-रेख बेहद जरूरी है, नहीं तो वह नष्ट हो जाएंगे। यही वजह है कि कम पौधे बच रहे हैं।
जुलाई-अगस्त में लगेंगे नौ लाख पौधे
इस बार जुलाई-अगस्त में भी भदोही जिले में लगभग नौ लाख पौधे लगाए जाएंगे। शासन से वन विभाग को इसका लक्ष्य मिल चुका है। इनमें से तीन लाख पौधे वन विभाग लगवाएगा, जबकि शेष छह लाख पौधे लगाने की जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों की रहेगी। डीएफओ के मुताबिक पौधरोपण के जरिए हरियाली बिखेरने का प्रयास किया जाएगा।