काशी से जाने वाले पुजारियों की टीम में पंडित दयानंद दुबे, पंडित रामानंद दुबे, पंडित सुशील ककोरिया, पंडित अनिल चौबे, पंडित रोहन मिश्रा, पंडित शिवशंकर मिश्रा शामिल हैं। मंदिर के पुजारी कई वर्षों से कोयंबटूर में 112 फीट के आदियोगी के सामने सप्तऋषि आरती करते आ रहे हैं। इस परंपरा को जारी रखते हुए ये पुजारी सद्गुरु के सानिध्य में बंगलुरु में प्राण प्रतिष्ठित योगेश्वर लिंग पर सप्तऋषि आवाहनम करेंगे।
शिव ने परमात्मा तक पहुंचने के 112 तरीके अपने सात शिष्यों को बताए। सद्गुरु जग्गी वासुदेव के अनुसार जब सप्तऋषियों को दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जाकर योग विज्ञान को प्रदान करना था, तो उन्होंने भगवान शिव से पूछा, ''हम आपकी उपस्थिति को अपने साथ कैसे ले जा सकते हैं?'' तब उन्होंने उन्हें एक सरल प्रक्रिया सिखाई, जो आज सप्तऋषि आवाहनम के रूप में विद्यमान है।