समागम को संबोधित करते हुए कहा कि जेपी को जिन हालात में संपूर्ण क्रांति का आवाहन करना पड़ा था, आज देश के हालात उनसे कहीं अधिक बदतर हो चुके हैं। अध्यक्षता करते हुए प्रो. आनंद कुमार ने कहा कि देश में आजकल हिंदू होने का नशा है। कुछ दशक पहले देश ने सिख होने का नशा भी देखा है। 1947/48 के दौर में इस देश ने मुसलमान होने के नशे का असर भुगता है। ऐसे वक्त में आज परिवर्तनकामी शक्तियों को एकत्र होते देखना सुखद है।
देश ने पहले भी निरंकुश सत्ता की बरगदी जड़ों को उखाड़कर फेंका है। आज तो हमारी लड़ाई ऐसे लोगों से है, जिनकी जड़ें बेहद कमजोर हैं। प्रदेश और खासकर बनारस के लोगों की जिम्मेदारी बड़ी है, जिन्होंने बुलडोजर की अपसंस्कृति को गले लगाया है।
स्वागत विजय नारायण ने किया। इस दौरान किरन, मजहर,रामचंद्र राही, पूर्व सांसद डीपी राय ने संबोधित किया। अंत में सर्वसेवासंघ की ओर से प्रकाशित अहिंसक क्रांति के पाक्षिक मुखपत्र सर्वोदय जगत के नए अंक का लोकार्पण हुआ।