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वाराणसी में प्रशांत भूषण बोले: पैसे का खेल बन गया है लोकतंत्र, ट्रोल आर्मी को लेकर कह दी बड़ी बात

Sat, 13 Aug 2022 07:58 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

सर्वसेवा संघ राजघाट परिसर में संघर्ष वाहिनी समन्वय समिति की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्र निर्माण समागम को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने 
संबोधित किया। 
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दो दिवसीय राष्ट्र निर्माण समागम में प्रशांत भूषण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि न्यायपालिका की हालत यह है कि वह मानवाधिकारों की रक्षा करने के बजाय, खुद मानवाधिकारों का हनन करने में लगी हुई है। हिमांशु कुमार और तीस्ता सीतलवाड़ के उदाहरण हमारे सामने हैं। कुल मिलाकर इस देश में अपसंस्कृति की एक संस्कृति खड़ी की जा रही है और देश को अंधकार में ले जाया जा रहा है। लोकतंत्र को पैसे का खेल बना दिया गया है।

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सर्वसेवा संघ राजघाट परिसर में संघर्ष वाहिनी समन्वय समिति की ओर से शनिवार को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्र निर्माण समागम को संबोधित करते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि आज देश में ज्यूडिशियल, इलेक्टोरल, एजूकेशनल और इंस्टिट्यूशनल रिफॉर्म्स की जरूरत है, सोशल मीडिया पर ट्रोल आर्मी खड़ी की जा रही है।

ठेके पर नौकरियों की व्यवस्था खत्म होनी चाहिए

इस ट्रोल आर्मी के सामने ट्रूथ आर्मी खड़ी करना समय की जरूरत और हमारी जिम्मेदारी है। देश के इन हालात से जूझने के लिए आंदोलन खड़े करने की जरूरत है। आज जिस मुद्दे पर देश के अधिकाधिक लोग जुड़ सकते हैं, वह है बेरोजगारी। रोजगार के कानूनी अधिकार की मांग होनी चाहिए, देश में सभी सरकारी रिक्तियों को छह महीने के अंदर विश्वसनीय तरीके से भरने की मांग हो, निजीकरण की प्रक्रिया तुरंत रोकने की मांग उठाने की जरूरत है। ठेके पर नौकरियों की व्यवस्था खत्म होनी चाहिए।

समागम को संबोधित करते हुए कहा कि जेपी को जिन हालात में संपूर्ण क्रांति का आवाहन करना पड़ा था, आज देश के हालात उनसे कहीं अधिक बदतर हो चुके हैं। अध्यक्षता करते हुए प्रो. आनंद कुमार ने कहा कि देश में आजकल हिंदू होने का नशा है। कुछ दशक पहले देश ने सिख होने का नशा भी देखा है। 1947/48 के दौर में इस देश ने मुसलमान होने के नशे का असर भुगता है। ऐसे वक्त में आज परिवर्तनकामी शक्तियों को एकत्र होते देखना सुखद है।
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देश ने पहले भी निरंकुश सत्ता की बरगदी जड़ों को उखाड़कर फेंका है। आज तो हमारी लड़ाई ऐसे लोगों से है, जिनकी जड़ें बेहद कमजोर हैं। प्रदेश और खासकर बनारस के लोगों की जिम्मेदारी बड़ी है, जिन्होंने बुलडोजर की अपसंस्कृति को गले लगाया है।

स्वागत विजय नारायण ने किया। इस दौरान किरन, मजहर,रामचंद्र राही, पूर्व सांसद डीपी राय ने संबोधित किया। अंत में सर्वसेवासंघ की ओर से प्रकाशित अहिंसक क्रांति के पाक्षिक मुखपत्र सर्वोदय जगत के नए अंक का लोकार्पण हुआ। 
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