अंदर जाने पर डिजिटल एक्सरे कक्ष पर ताला लगा रहा। ऑपरेशन थिएटर में भी ताला लटकता मिला। इसके गेट पर कूलर रख दिया गया है। कुत्ता काटने के बाद एआरवी भूतल पर औषधि भंडार कक्ष के पास बने कमरे में लगाई जाती है। वह भी सुबह 9 बजे तक नहीं खुली। यहां पर्चा जमा कर लोग ताला खुलने का इंतजार करते रहे। लोगों ने बताया कि हर दिन सुबह 9 बजे से पहले कभी भी नहीं खुलता है। इस वजह से परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नौ बजे के बाद शुरू हो सका सीटी स्कैन
अस्पताल परिसर में ट्रॉमा सेंटर के बाहर ही सीटी स्कैन सेंटर बना है। यहां मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। यहां करीब सवा आठ बजे कर्मचारी आए। पर्चा जमा करवाने के बाद सुबह 9.15 बजे के बाद ही सीटी स्कैन शुरू हो सका। तब तक मरीज वहीं जमीन पर बैठे रहे। कुछ लोग ज्यादा थक गए थे तो वहीं पर लेट गए।
जिला अस्पताल परिसर में ही गर्भवती महिलाओं के जांच, इलाज के लिए 50 बेड वाला एमसीएच विंग भी चलता है। यहां वैसे तो कागज पर सुबह 8 बजे से दोपहर दो बजे तक ओपीडी का समय है लेकिन सोमवार की सुबह नौ बजे तक यहां कोई डॉक्टर नहीं आया। पहले तल पर स्त्री रोग विशेषज्ञ से लेकर ईएमओ, बाल रोग विशेषज्ञ सहित अन्य डॉक्टरों का कमरा बना है। महिलाएं कमरों के बाहर बैठी रही लेकिन सुबह 9 बजे तक डॉक्टर नहीं आई थीं।
नर्सिंग की पढ़ाई करने वाली कुछ छात्राएं चिकित्सकीय कामकाज में सहयोगी की भूमिका निभाती हैं। वह आ तो गई थी लेकिन बिना डॉक्टर के आए वह भी कुछ नहीं कर सकती थी। डॉक्टरों के कमरों के बाहर बैठी गर्भवती महिलाओें और उनके परिजनों का कहना था कि ओपीडी में वैसे भी सुबह 9 बजे तक ही डॉक्टर से मुलाकात हो पाती है। समय से डॉक्टर बैठ जातीं तो सहूलियत होती।