कोरोना की चुनौतियों के बीच काशी का एक युवा उद्यमी इन दिनों लोकल फॉर वोकल के नारे को साकार करने में जुटा है। स्वादिष्ट भोजन के साथ ही मिट्टी की खुशबू को घर-घर पहुंचा रहा हैं। एकतरफ जहां काशी की जनता की जबान पर मिट्टी की हांडी के व्यंजनों का स्वाद घुल रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ युवा उद्यमी ने मिट्टी का काम करने वालों को भी संक्रमण के दौर में रोजगार के अवसर दिया है।
कोरोना संक्रमण के दौरान जहां काशी के होटल, रेस्तरां बंद चल रहे थे, उसी समय युवा उद्यमी शरद ने अनलॉक के बाद से खाने की होम डिलीवरी का काम शुरू किया। घर-घर मिट्टी की सुगंध पहुंची तो जनता ने भी इस पहल को हाथों हाथ लिया। नक्खीघाट के युवा उद्यमी शरद ने पीएम के लोकल फार वोकल से प्रेरित होकर आपदा को अवसर में बदल दिया है। सबसे खास बात यह है कि शरद ने मिट्टी के बर्तनों में बने भोजन को मिट्टी के बर्तनों में ही घर-घर पहुंचाना शुरू किया। शुरूआत तो छोटी थी लेकिन जब मिट्टी का स्वाद लोगों की जुबां पर चढ़ने लगा तो आर्डर की संख्या भी बढ़ने लगी।
नक्खीघाट के युवा उद्यमी शरद ने बताया कि गोहरी पर मिट्टी के बर्तनों में बने भोजन की होम डिलीवरी शुरू की गई। इसमें चिली पनीर, मंचूरियन, हांडी पनीर, पालक पनीर, मशरूम के अलावा नानवेज भी तैयार कराया जाता है। इसमें मिट्टी के बर्तन बनाने वाले, उपला बनाने वाले, खाना बनाने वाले कारीगर और खाने को लोगों तक पहुंचाने वाले लोगों को रोजगार मिला है। शरद ने बताया कि उनके इस नए प्रयोग को काफी पसंद किया जा रहा है। मिट्टी की जो सुगंध और स्वाद लोग खो चुके थे, उसको इस आपदा में लोगों तक पहुंचाने की पहल ने नया रास्ता खोल दिया है।
मिट्टी के बर्तनों में बना भोजन है लाभदायक
बीएचयू के वैद्य डॉ सुशील दुबे ने बताया कि मिट्टी में कई गुण पाए जाते हैं। जब हम मिट्टी के बर्तन में खाना पकाते हैं या खाते हैं तो कई सारे पोषक तत्व शरीर को मिलते हैं। इसमें जिंक, मैग्नीशियम, आयरन जैसे प्रमुख खनिज तत्व शामिल हैं।