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वाराणसी में प्रदूषण ने बढ़ाई बीमारी: नाक, कान और गले के मरीज बढ़े, ओपीडी में लगी रही मरीजों की भीड़

Wed, 24 Nov 2021 11:49 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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वातावरण में फैली धुंध। - फोटो : अमर उजाला
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दीपावली के बाद से ही मौसम में तेजी से बदलाव हुआ है और प्रदूषण का स्तर भी बढ़ा है। इसके चलते शहर कभी रेड जोन तो कभी ऑरेंज जोन में बना हुआ है। इसमें सामान्य लोगों के साथ ही पहले से बीमार लोगों को अधिक खतरा है। प्रदूषण का ग्राफ बढ़ने की वजह से ही नाक, कान, गला के मरीजों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। इसे देखते हुए चिकित्सक लोगों से सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। इसमें गले में खराश के साथ सुनने में दिक्कत और एलर्जी की समस्या अधिक है।

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प्रदूषण बढ़ने और मौसम में बदलाव का असर अस्पतालों की ओपीडी में भी देखने को मिल रहा है। बीएचयू अस्पताल के ईएनटी डिपार्टमेंट की ओपीडी में मंगलवार को मरीजों की भीड़ रही। चिकित्सक डॉ. विश्वंभर सिंह का कहना है कि निश्चित ही प्रदूषण का ग्राफ बढ़ने की वजह से मरीजों को परेशानी हुई है।

10 दिन पहले तक जहां ओपीडी में आने वाले 200 से 300 मरीजों में गले में दर्द, खराश, कान में दर्द, कम सुनाई देने जैसी समस्या के 10 से 15 मरीज आते थे। अब यह संख्या 30 से 35 तक पहुंच गई है। इस समय धूल, धुआं अधिक होने से गले में दर्द की समस्या होती है।

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मरीजों में नाक में दर्द, जुकाम होने की समस्या भी बनी है। उधर, मंडलीय अस्पताल के ईएनटी चिकित्सक डॉ. हरिचरण सिंह का कहना है कि ओपीडी में गले में खराश, कान में दर्द वाले 10 से 15 मरीज पहुंच रहे हैं। ऐसे लोगों को सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।
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ये बरतें सावधानी
घर से बाहर निकलते समय नाक-मुंह ढंककर ही निकलें
सुबह और शाम गुनगुने पानी से गरारा जरूर करना चाहिए
जरूरत के हिसाब से भाप भी लेनी चाहिए
बिना मॉस्क लगाए बाहर निकलने से परेशानी हो सकती है। 
किसी भी समस्या पर चिकित्सक को तुरंत दिखाएं। बिना जांच के दवा न लें।
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