पार्षद संजय विश्वंभरी।
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नाराज पार्षद ने मीडिया के सामने रोते हुए कहा कि वह जनता के वोट से चुनकर आए हैं, लेकिन शिलापट पर उनका पद तक नहीं लिखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्ड की जिम्मेदारी नामित पार्षद को सौंप दी गई है और निर्वाचित जनप्रतिनिधि की अनदेखी की जा रही है।
पार्षद संजय विश्वंभरी ने कहा कि वह इस पूरे मामले को पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के सामने रखेंगे। उनका कहना है कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि की उपेक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित संदेश नहीं है। वहीं, दूसरी ओर शिलान्यास कार्यक्रम के बाद यह मुद्दा स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना यह होगा कि यह नाराजगी केवल शिलापट तक सीमित रहती है या आने वाले दिनों में भाजपा की स्थानीय राजनीति में नए समीकरणों को जन्म देती है!