सुप्रीम कोर्ट के साथ ही एनजीटी की भी सख्ती : जिला एवं सत्र न्यायालय में अधिवक्ता विकास सिंह ने बताया कि चीनी मांझे का उपयोग और बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंधित है। सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस पर सख्त गाइडलाइंस जारी की है। पतंग उड़ाने के लिए केवल पारंपरिक, हानिरहित सूती धागे (कॉटन थ्रेड) के इस्तेमाल की ही अनुमति है।
प्रतिबंधित मांझा बेचने या इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है। इनमें 5 साल तक की जेल या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है। लापरवाही से मौत पर हत्या में प्राथमिकी दर्ज होगी।
सामनेघाट पुल, तरना और फुलवरिया में भी हुए हादसे : पिछले साल मकर संक्रांति के समय सामने घाट पुल पर चढ़ते हुए बाइक सवार जितेंद्र मौर्य प्रतिबंधित चीनी मांझे की चपेट में आ गए थे। इससे जितेंद्र लहूलुहान हो गए उन्हें तुरंत पास के रामनगर चिकित्सालय ले जाया गया था। दुर्गाकुंड क्षेत्र में एक स्कूटी सवार युवती का चेहरा मांझे से कट गया था। रामनगर पुल के पास भी एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ था। फुलवरिया फोरलेन और शिवपुर के तरना पुल पर भी बाइक सवारों की गर्दन में चीनी मांझा फंस गया था। इससे गंभी चोट आई थी।
पतंग मार्केट में पहुंची पुलिस।
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गिरफ्तारी हुई, प्रभावी पैरवी न होने से मिली दुकानदारों को राहत
- प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद प्रभावी पैरवी नहीं होती है। इससे चीनी मांझे की बिक्री करने वाले दुकानदारों को आसानी से जमानत मिल जाती है।
- जनवरी 2026 में दुकानों से 88 किलोग्राम चीनी मांझा जब्त कर विनोद कुमार पटेल को गिरफ्तार किया था।
- जनवरी 2025 में मकर संक्रांति से पहले पुलिस ने 1.5 करोड़ रुपये का लगभग 15000 किलो मांझा पकड़ा था। 4 लोगों को गिरफ्तार किया था।
- दिसंबर 2025 में 5 दुकानों से 202 किलो चीनी मांझा मिला था। 5 दुकानदारों को गिरफ्तार कर 4 प्राथमिकी दर्ज की गई थी।