फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गाजीपुर में अवैध संवासिनी गृह पर छापा, दो महिलाओं सहित तीन पकड़े, संचालक पर केस दर्ज

Fri, 10 Aug 2018 11:02 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
विज्ञापन
अवैध संवासिनी गृह में जांच करते अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
यूपी के देवरिया जिले में निजी बालिका गृह की जांच में 18 लड़कियों के गायब होने का मामला उजागर होने के बाद सूबे में हड़कंप मचा हुआ है। अब गाजीपुर में जिला प्रशासन की टीम ने आबकारी विभाग के सामने अवैध तरीके से संचालित संवासिनी गृह पर फोर्स के साथ गुरुवार की देर रात छापेमारी की। इस दौरान दो महिलाओं सहित तीन लोग दबोचे गए।
विज्ञापन


फर्जी तरीके से चलाए जा रहे आश्रय गृह से बरामद दोनों महिलाओं की काउंसलिंग करने के बाद उन्हें उनके घर भेजने की कवायद शुरू कर दी गई है। प्रशासनिक अफसरों के निर्देश पर जिला अस्पताल में बरामद महिलाओं की कुछ आवश्यक जांच भी कराई गई है।  शुक्रवार को जिलाधिकारी के निर्देश के बाद अल्पवास गृह के संचालक के खिलाफ शहर कोतवाली में जेजे एक्ट की धारा 40 और 41 के तहत मुकदमा पंजीकृत करा लिया गया है। फिलहाल संवासिनी गृह पर ताला लटका हुआ है तथा उसके अन्य कर्मचारी फरार हैं।

देवरिया और बिहार के मुजफ्फरपुर में बालिकाओं से दुराचार की घटना के बाद सक्रिय प्रशासन ने  शहर में छापेमारी शुरू की थी। गुरुवार को देर रात लंका स्थित आबकारी विभाग के सामने चलाए जा रहे महिला अल्पवास गृह पर एडीएम राजेश कुमार, एसडीएम शिवशरण अप्पा, जिला प्रोबेशन अधिकारी अनिल सोनकर, तहसीलदार मुकेश कुमार आदि की टीम ने छापेमारी की थी।
विज्ञापन


वहां से दो महिलाओं को बरामद कर गोराबाजर स्थित आशा ज्योति केंद्र पर भेज दिया गया और संचालक को पूछताछ के लिए गिरफ्तार कर लिया गया।  जांच में  पाया गया कि पूर्व में सचल पालना गृह - स्वधार योजना के तहत इस महिला अल्पवास गृह को मान्यता मिली थी। 12 वर्ष पूर्व इसकी स्थापना हुई थी जिसका उद्देश्य नरेगा मजदूरों के बच्चों को रखना था।

शासन के निर्देश पर प्रदेश के सचल पालना गृहों की जांच के आदेश दिए गए थे। सीबीआई द्वारा इस जांच में अनियमितता पाए जाने पर जून 2017 में सीबीआई ने इसका संचालन बंद करा दिया। इसके बाद इस केंद्र पर प्रभात कुमार विकास समिति के तहत खुला आश्रय गृह का बोर्ड लगा दिया गया। जांच में पाया गया कि इस केंद्र का पंजीकरण नहीं था। जिससे यह अवैध रूप से चल रहा था।

छापेमारी के दौरान दो महिलाएं मिलीं जिन्हें आशा ज्योति केंद्र पर भेज दिया गया। इसमें से एक महिला के पास एक वर्ष का बच्चा भी है। शुक्रवार को जिला अस्पताल में इनकी जांच कराई गई। इस केंद्र का संचालन क्यों हो रहा था और इसके लिए धन कहां से आता था। इसकी पूछताछ संचालक से की जा रही है।    

जिला प्रोबेशन अधिकारी  अनिल कुमार सोनकर ने कहा कि    जिलाधिकारी के निर्देश के बाद संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दिया गया है। महिला अल्पवास गृह का अवैध संचालन किया जा रहा था इसकी जांच की जा रही है।  महिलाओं को उनके घर भेजने का प्रयास किया जा रहा है।

छह माह से रखी गई थीं दोनों महिलाएं

गाजीपुर में अवैध रूप से संचालित महिला अल्पवास गृह की भनक किसी को नहीं थी। यहां पिछले छह माह से दो महिलाओं को रखा गया था। मुजफ्फरपुर और देवरिया के बालिका गृहों की घटना के बाद नींद से जागा जिला प्रशासन को फर्जी बालिका गृहों की याद आई। इसके बाद पड़ताल शुरू की गई। जिला प्रशासन के निर्देश पर अब पूरे फर्जीवाड़े की जांच होगी। संस्था को फंड कहां से मिलता था और रखी गई महिलाओं को भोजन की व्यवस्था कैसे होती थी इसकी जांच कराई जाएगी।

जिला मुख्यालय स्थित आबकारी विभाग के ठीक सामने संचालित अल्पवास गृह के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं थी। विभाग ही नहीं, प्रशासनिक अधिकारी भी इससे बेखबर थे। इसकी न कभी जांच हुई थी और न ही कार्रवाई। देखा जाए तो यहां से कुछ कदम की दूरी पर ही कई आला अधिकारी भी रहते हैं।

गुरुवार की रात पकड़ी गई दोनों महिलाओँ को आशा ज्योति केंद्र ले जाया गया है। दोनों के बारे में पूरी जानकारी लेने के बाद उनको घर पहुंचाने की तैयारी चल रही है। जिला प्रोवेशन अधिकारी अनिल सोनकर ने बताया कि करीब डेढ़ दशक पहले सचल पालना गृह-स्वधार योजना के नाम से संस्था को लाइसेंस मिला था। इसमें नरेगा मजदूरों के बच्चों को रखना तथा उन्हें भोजन मुहैया कराना था। यह कार्य कई वर्षों तक चलता रहा। शासन के निर्देश पर सचल पालना गृहों की कुछ वर्ष पहले पूरे प्रदेश में जांच की गई थी। इसमें भारी अनियमितता मिलने पर इसे बंद करने का आदेश दिया गया।

जून 2017 में यहां जिला प्रशासन की टीम ने छापेमारी कर इसे हमेशा के लिए बंद कर दिया था। इसके बाद संचालक प्रभात कुमार ने विकास समिति के नाम से एक एनजीओ बना कर खुला आश्रय गृह खोल दिया। साथ ही भवन पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से संचालित महिला अल्पवास गृह का बोर्ड भी लगा दिया। लेकिन केंद्र का जेजे एक्ट के तहत पंजीकरण नहीं कराया गया।

बिना पंजीकरण के ही इसमें महिलाओं को रखने का काम शुरू हुआ। पंजीकरण के बिना यह केंद्र महीनों से संचालित हो रहा था। गुरुवार की रात इसकी शिकायत किसी ने जिलाधिकारी के बाला जी से की इसके बाद इसका संज्ञान लिया गया। फिर देर रात अधिकारियों ने यहां छापेमारी की। जिसमें दो महिलाओं को बरामद किया गया। उनकी उम्र 18 से 20 वर्ष के बीच  है। 
विज्ञापन

सीबीआई जांच में गड़बड़ी मिलने पर बंद हुआ था ताला

सीबीआई
गाजीपुर जिले में सचल पालना गृह-स्वधार योजना नामक संस्था की स्थापना नरेगा मजदूरों के बच्चों के पालन-पोषण के उद्देश्य से किया गया था। प्रोवेशन अधिकारी अनिल सोनकर की माने तो शासन स्तर से कराई गई जांच में गड़बड़ी मिलने तथा धन का बंदरबांट होने पर इस प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई ने जांच के बाद इसे बंद करने की रिपोर्ट दी थी। इसके बाद इसका लाइसेंस निरस्त कर जून 2017 को इसे हमेशा के लिए बंद कर दिया गया था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें