ड्रग इंस्पेक्टर जुनाब अली ने बताया कि बिहार में जांच के बाद भी इन किसी भी फर्म से कोई भी कागजात नहीं दिया गया। गोरखपुर के कूड़ाघाट सिंघड़िया में मेसर्स वीप्रा फार्मास्यूटिकल्स से सारनाथ की पीडी फार्मा को 100 एमएल की 13000 बॉटल फेंसेडील कफ सिरप की बिक्री की गई है। इस पर भी सारनाथ की फर्म से बिक्री के कागजात मांगने पर नहीं मिले। यहीं नहीं पोर्टल पर जो मोबाइल नंबर है, वो भी बंद मिला।
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तीन साल में जारी हुए लाइसेंस की नए सिरे से खुलेगी फाइल
कफ सिरप प्रकरण में एक के बाद एक जालसाजी का खुलासा होने के बाद फर्मों पर कार्रवाई के बाद अब अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी है। इसमें खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन की ओर से अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करवाई जानी है। इसके लिए पिछले तीन साल में वाराणसी सहित आसपास के जिलों में तैनात अधिकारियों के कार्यकाल में उनके द्वारा जारी लाइसेंस संबंधी फाइलों को नए सिरे से खोला जा सकता है। लखनऊ से जांच करने आई एडिशनल कमिश्नर रेखा एस चौहान ने अधिकारियों पर भी नाराजगी जताई थी। बातचीत में उन्होंने बताया कि जिस जिस फर्मों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई गई और लाइसेंस निरस्त किया गया है, उनके लाइसेंस किस अधिकारी के कार्यकाल में जारी हुए थे, उसकी जांच भी करवाई जा रही है। संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा जाएगा। कुल मिलाकर अधिकारियों की इस प्रकरण में भूमिका की जांच करवाई जाएगी।