पुलिसकर्मियों को कपड़े की व्यवस्था सरकारी फंड से कराई गई है। जो भी पुलिसकर्मी इस ड्यूटी के लिए तैनात किए जाएंगे, उन्हें दो सेट पुजारी के कपड़े सरकारी फंड से उपलब्ध कराए जाएंगे।
यह व्यवस्था आगे भी बरकरार रहेगी या पिछली बार जैसा ही हश्र होगा?
श्रद्धालुओं के फीडबैक के साथ ही मंदिर प्रशासन और डीसीपी सुरक्षा के माध्यम से हम नई व्यवस्था की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। जो खामियां सामने आएंगी, उन्हें तत्काल दुरुस्त कराया जाएगा। परिणाम सार्थक और सकारात्मक रहा तो श्रद्धालुओं के हित में यही प्रयास किया जाएगा कि यह व्यवस्था स्थायी हो जाए।
बाबा धाम में सेवा का अवसर पुण्य से मिलता है
गर्भ गृह के प्रवेश द्वारों पर पुजारी के वेश में तैनात पुलिस कर्मी पवन कुमार यादव, सुधीर कुमार यादव और संजीव कुमार सिंह का कहना था कि बाबा विश्वनाथ के धाम में सेवा का अवसर पुण्य से मिलता है। ड्यूटी हमें करनी ही है। इस तरह की ड्यूटी कर कुछ अलग महसूस हो रहा है। श्रद्धालु भी नि:संकोच हम लोगों से विश्वनाथ धाम के अलावा काशी के अन्य मंदिरों के साथ ही यहां की अन्य बातें भी पूछ रहे हैं।
कहां दर्शन और कहां जा सकते हैं, यह सब बताए
विश्वनाथ धाम में दोपहर बिहार के औरंगाबाद से संपर्क प्रताप सिंह के साथ 10-11 श्रद्धालुओं का जत्था आया था। उनसे पूछा गया कि गर्भ गृह के प्रवेश द्वारों पर जो महिला-पुलिस पुजारी (पुलिस) तैनात हैं, उनका व्यवहार कैसा था? संपर्क प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने ही हमें बताया कि बाबा विश्वनाथ का शिवलिंग कहां है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि धाम में अन्य किन-किन मंदिरों में दर्शन होता है। कालभैरव मंदिर का रास्ता भी वही पुजारी (पुलिस) लोग ही बताए हैं।