इसके गिरोह में शामिल गाजीपुर, मरदह निवासी विकास गौैड़, मरदह के राहुल तिवारी, गाजीपुर के शादियाबाद निवासी नितेश सिंह और मऊ के चिरैयाकोट निवासी अरूण मिश्रा को गिरफ्तार किया गया। जबकि स्कार्पियो में प्रबंधक को गोली मारने वाले दो शूटर गाजीपुर के धीरेंद्र सिंह और राजू पंडित थे। घटना वाले दिन नौ जून को जब प्रबंधक के स्कार्पियो में दोनों शूटर राजू और धीरेंद्र सवार हुए थे तब उन्हें प्रबंधक ने बैग में भरा पैसा दिखाया था और कहा था कि ट्रांजेक्शन होने के बाद ही रकम मिलेगा।
इतना कहते हुए बैंक प्रबंधक ने बैंक में आगे की बातचीत करने के उद्देश्य से गाड़ी जौनपुर के लिए घुमवा दी। शूटर धीरेंद्र और राजू पंडित को लगा कि पैसा हाथ से निकल जाएगा तो धीरेंद्र का इशारा मिलते ही राजू पंडित ने प्रबंधक के कनपटी से नीचे सटाकर गोली मार दी थी।
पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अमित वर्मा ने बताया कि प्रबंधक की हत्या करने की नियत किसी की नहीं थी। बदमाशों का पूरा ध्यान लूट पर था। घटना वाले दिन संदहा में गिरोह के सरगना आलोक राय ने मुकेश पाल के संग बैठकर लूट की योजना बनाई थी। जहां पर गाजीपुर से स्कार्पियो में सवार होकर नितेश सिंह, विकास गौड़, राहुल तिवारी, राजू पंडित, धीरेंद्र सिंह, सतपाल और अरुण मिश्रा साथ आए थे। यहां सभी ने शराब व बीयर पीकर और आलोक राय के कहने पर लूट करने के लिए तैयार हुए। इसमें राहुल, अरुण मिश्रा व सतपाल उतर गए। बाकि सभी स्कार्पियो से लूट की घटना को अंजाम देने के लिए रवाना हुए थे।
वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश कपसेठी की ओर से होकर गाजीपुर भागे थे। हालांकि कपसेठी में स्कार्पियो का टायर पंचर हुआ था तो गाड़ी छोड़कर बदमाश दूसरे वाहन से भाग निकले थे। आरोपी मुकेश पाल अपनी बाइक से शूटरों को रास्ता दिखा रहा था। मास्टर माइंड आलोक राय ने पुलिस की पूछताछ में कबूला कि शूटर राजू पंडित और धीरेंद्र सिंह ने बैग लूटकर आए थे तो उसमें से एक लाख रुपये मुझे और नितेश को देते हुए फरार हो गए थे।
वांछित गाजीपुर निवासी सतपाल के बारे में फूलपुर इंस्पेक्टर दुर्गेश कुमार मिश्रा ने बताया कि डबल मर्डर में उसका पिता जेल में बंद हैं। पिता को छुड़ाने और मजबूत पैरवी के लिए सतपाल के पास पैसा नहीं था तो मास्टरमाइंड आलोक राय ने उसे जरायम का रास्ता दिखाया। गिरफ्तार हुए बदमाश राहुल तिवारी के मित्र सतपाल की तलाश में पुलिस लगी हुई है। सतपाल को मास्टरमाइंड ने लालच दिया था कि काम होने के बाद ढाई से तीन लाख रुपये मिलेंगे। पुलिस की गिरफ्त में मऊ के चिरैयाकोट निवासी अरूण मिश्रा इस वजह से योजना में शामिल हुआ कि लूट होने पर 50 हजार रकम मिलेगी। इसके एवज में उसने अपनी मोबाइल शूटर राजू पंडित को दी थी।
पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अमित वर्मा ने बताया कि बैंक प्रबंधक मड़ियाहूं शाखा से 41 लाख रुपये लेकर बैंक से सुबह 11 बजे निकले थे। इसके बाद वह अपनी ब्रांच करखियांव से छह लाख रुपये शाम को निकाले। जांच के दौरान यह भी सामने आ रहा है कि बैंक प्रबंधक बीच में कहीं कुछ पैसे बैग से निकाले थे। चूंकि मड़ियाहूं ब्रांच से सफेद बैग में पैसा लेकर बैंक प्रबंधक निकले थे और घटना वाले दिन सफेद की जगह मटमैला रंग का बैग बरामद हुआ था।