अमावस्या के श्राद्ध पर भोजन में खीर पूड़ी का होना आवश्यक है। भोजन कराने और श्राद्ध करने का समय दोपहर होना चाहिए। ब्राह्मण को भोजन कराने के पूर्व पंचबली दें और हवन करें। भोजन कराने के बाद में घर के सभी सदस्य एक साथ भोजन करें और पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।
शास्त्रों के अनुसार, पीपल के पेड़ में सभी देवी-देवता और पितरों का वास होता है। मान्यता है अमावस्या तिथि पर पीपल की पूजा करने पर पितृदेव प्रसन्न होते हैं। तांबे के लोटे में जल, काला तिल और दूध मिलाकर पीपल के पेड़ पर अर्पित करें। उसके बाद ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः मंत्र का जाप करें।