शहर से लेकर गांव-कस्बों में जाकर गणनाकर्मी लोगों से सवाल-जवाब के आधार पर आर्थिक स्थिति की गणना कर रहे हैं। यानी एक तरह से घर-परिवार व व्यवसाय की डिजिटल आर्थिक कुंडली तैयार कर रहे हैं। सभी ब्लॉक में हो रही जनगणना को अगले छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। विरोध करने वाले टीम से कहने लगे कि हम कागज नहीं दिखाएंगे।
इस पर टीम ने कहा कि उन्हें कागज़ नहीं देखना है। सिर्फ मुखिया नाम और परिवार की कमाई का जरिया चाहिए। टीम ने समझाने की कोशिश की। बताया कि यह आर्थिक गणना हो रही है। इसके बावजूद ग्रामीण नहीं माने और टीम के सदस्यों से दुर्व्यवहार करने के बाद सभी को बैठा लिया।