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काशी विश्वनाथ मंदिर से मां विंध्यवासिनी धाम निकले पदयात्री

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ढोल नगाड़ों की धुन पर नाचते गाते माता के भक्तों का जत्था जब रवाना हुआ तो रास्ते भर फूल बरसाकर लोगों ने स्वागत किया। कई पीढ़ियों से चली आ रही मां विंध्यवासिनी पदयात्रा काशी विश्वनाथ धाम से मिर्जापुर के लिए शनिवार शाम रवाना हुई। गुरुद्वारा गुरुबाग में खत्री समाज के लोगों ने गुरु चरणों में शीश नवाकर मां के धाम के लिए प्रस्थान किया।
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शनिवार 11 बजे श्री बाल माता मंदिर देवी कोठा से मां विंध्यवासिनी पदयात्रा की शुरुआत हुई। मां भगवती का शृंगार व दिवंगत महंतों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पदयात्री भद्रकाली मंदिर होते हुए धर्मशाला नेपाली खपड़ा पहुंचे। स्व. आत्मा राम सैगल के परिजनों ने ज्योति पूजन कर भक्तों को प्रसाद वितरित किया। खत्री हितकारिणी सभा ने भक्तों का स्वागत किया।
महंत दीपक बहल ने सभी महंतों का दुपट्टा ओढ़ाकर स्वागत किया गया। पदयात्रियों का जगह-जगह स्वागत किया गया। बांसफाटक, हौजकटोरा, गोदौलिया और लक्सा पर श्रद्धालुओं ने पदयात्रियों पर फूल बरसाए। मां का रथ आकर्षक ढंग से सजाया गया था। पदयात्रा का प्रथम पड़ाव भीमचंडी देवी राजातालाब और दूसरा पड़ाव हनुमान मंदिर बरैनीघाट कछवां में होगा। षष्ठी को सभी भक्त मां के धाम पहुंचेंगे और सप्तमी से एकादशी तक रोजाना मंदिर परिसर में जागरण होगा। देवी कोठा के मेले का संचालन लाला हरनारायण मल जयगोपाल बहल चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर किया जा रहा है। शोभायात्रा में अशोक धवन, दीपक बहल, दयाशंकर मिश्रा (दयालु गुरु), सुनील मेहरोत्रा, विजयरमन सेठ, मुकेश कक्कड़, अमित धवन, विजय मेहरोत्रा, हरीश वालिया, हरी खन्ना, संजय अरोड़ा, मनीष सैगल, रामनाथ मेहरोत्रा उपस्थित रहे।
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