जैन मुनि 108 विशद सागर महाराज ने कहा कि हम सभी को सरल स्वभाव रखना चाहिए, कपट का त्याग करना चाहिए। कपट के भ्रम में जीना दुखी होने का मूल कारण है। आत्मा ज्ञान, खुशी, प्रयास और विश्वास जैसे असंख्य गुणों से सिंचित है। सीधा-सादा सरल होना ही सहजता है और सहजता ही जीवन में आ जाना ही सरलता है।
वह रविवार को पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन जैन मंदिर भेलूपुर में प्रवचन कर रहे थे। जैन मुनि ने कहा कि जो मनुष्य अपने मन से कपट करना, धोखा देना, चोरी करना के भाव को निकाल देता है व अपने स्वभाव को सरल व विनय से युक्त बना लेता है, उसे ही उत्तम आर्जव धर्म कहते हैं। कपटी व्यक्ति स्वयं अपने को धोखा देता है, वह दूसरे की अपेक्षा स्वयं से अपनी ही हानि अधिक करता है। मनुष्य अगर छल करके लक्ष्मी प्राप्त कर लेता है तो वह लक्ष्मी शाश्वत नहीं रह पाती हैं, नष्ट हो जाती हैं।