बता दें कांग्रेस के बाद रमाकांत यादव 1989 में बसपा के टिकट पर, 1991 में सजपा के टिकट पर और 1993 में सपा के टिकट पर विधायक चुने गए। इसके बाद उन्होंने फूलपुर की राजनीतिक विरासत अपनी पत्नी रंजना यादव को सौंप दी और खुद सदर सीट पर संसदीय राजनीति शुरू की और यहां भी सफल रहे। लेकिन फूलपुर मेें उनका यह प्रयोग विफल साबित हुआ।
1996 और 2002 में यहां कांग्रेस के टिकट पर पूर्व मुख्यमंत्री रामनरेश यादव ने रमाकांत यादव की पत्नी रंजना यादव को हरा दिया। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अपनी इस सफलता को बरकरार नहीं रख सके और अंतत: 2007 के चुनाव में रमाकांत यादव के पुत्र अरुण यादव के हाथों रामनरेश यादव को हार का सामना करना पड़ा।
यह संयोग ही है कि 2012 के चुनाव में रामनरेश यादव के पुत्र अजय नरेश कांग्रेस के टिकट पर और रमाकांत यादव के भतीजे वीरेंद्र यादव की लड़ाई में सपा के श्याम बहादुर यादव ने बाजी मारी और विधायक बने। इसके बाद फिर 2017 के विधानसभा चुनाव में रमाकांत यादव के पुत्र अरुण कांत यादव भाजपा के टिकट पर सपा के श्याम बहादुर यादव को हराकर विधायक बने। वर्तमान में यह सीट रमाकांत यादव के परिवार में ही है।
फूलपुर-पवई विधानसभा क्षेत्र में किसान बड़े पैमाने पर लाल सोना की खेती करते हैं। यहां से लाल मिर्च का देश के अन्य हिस्सों में भी निर्यात किया जाता है। क्षेत्र में लगभग 2000 हेक्टेयर में किसान लाल मिर्च की खेती करते हैं। क्षेत्र के किसान लाल मिर्च की खेती से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करते हैं।
फूलपुर स्थित मिर्चा मंडी में दूर-दूर से व्यापारी आकर लाल मिर्च की खरीद करते हैं। कुछ कारोबारी किसानों के खेतों से सीधे खरीदारी करते हैं। इसके अलावा क्षेत्र के किसान धान और गेहूं की खेती भी बड़े पैमाने पर करते हैं।