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Pankaj Tripathi: पिता के निधन से टूटे पंकज त्रिपाठी, वाराणसी में गंगा में प्रवाहित की अस्थियां, हुए भावुक

Fri, 25 Aug 2023 08:43 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

अभिनेता पंकज त्रिपाठी शुक्रवार को वाराणसी पहुंचे। यहां उन्होंने अस्सी घाट से बजड़े पर सवार होकर गंगा में पिता की अस्थियों का विसर्जन किया। 22 अगस्त को पंकज त्रिपाठी के पिता पंडित बनारस तिवारी का निधन हुआ था। 
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पंकज त्रिपाठी ने पिता की अस्थियों का गंगा में किया विसर्जन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी अपने पिता की निधन के बाद से बेहद टूट गए हैं। वो शुक्रवार को वाराणसी पहुंचे। अस्सी घाट पर पिता की अस्थियों को मां गंगा में विसर्जित किया। वैदिक रस्मों रिवाज के दौरान वो बेहद भावुक नजर आए। नम आंखों से उन्होंने बीच गंगा में अस्थियां विसर्जित की। पंकज त्रिपाठी अन्य करीबियों के साथ शुक्रवार दोपहर बाद सिर पर सफेद गमछा, चेहरे पर मास्क और हवाई चप्पल पहने अस्सी घाट पहुंचे।

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वहां बजड़े पर ही कर्मकांडी विद्वान बलराम मिश्रा के नेतृत्व में पांच ब्राह्मणों ने करीब घंटे भर पूजन कराया। इसके बाद मोक्षदायिनी की धारा में अस्थियां प्रवाहित करते ही पंकज त्रिपाठी फफक पड़े। बजड़े पर मौजूद रहे लोगों ने उन्हें ढाढस बंधाया। पिता को खोने का दर्द उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था।

अस्थि विसर्जन के बाद पंकज त्रिपाठी ने अस्सी घाट स्थित आरती कार्यालय में चाय की चुस्की ली। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने उनसे बात करने की कोशिश की लेकिन पंकज त्रिपाठी शांत रहे। इसके बाद गोपालगंज स्थित घर के लिए रवाना हो गए।  बीते 22 अगस्त को पंकज त्रिपाठी के पिता पंडित बनारस तिवारी की मौत हो गई थी। वो 98 वर्ष के थे और कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। 
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पंकज त्रिपाठी ने पिता को समर्पित किया अवॉर्ड

पंकज त्रिपाठी ने अपने करियर में कई फिल्मों में शानदार परफॉर्मेंसेस दीं और कई अवॉर्ड्स अपने नाम किये। गुरुवार को ही उन्हें देश के सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड समारोहों में से एक नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स 2023 में फिल्म 'मिमी' के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवॉर्ड मिला। अभिनेता ने जारी किए गए बयान में कहा, 'यह दुर्भाग्य से मेरे लिए हानि और शोक का समय है।
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अगर, बाबूजी आसपास होते तो वे मेरे लिए बहुत खुश होते। जब मुझे पहली बार राष्ट्रीय पुरस्कार का उल्लेख मिला तो उन्हें बहुत गर्व और प्रसन्नता हुई थी। यह राष्ट्रीय पुरस्कार मैं उन्हें और उनके जज्बे को समर्पित करता हूं। मैं आज जो कुछ भी हूं उसकी वजह से हूं। इस समय मेरे पास शब्द नहीं हैं, लेकिन मैं खुश हूं और टीम का आभारी हूं। 


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