अस्थि कलश विसर्जन के लिए निकली यात्रा
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शनिवार को सिगरा स्थित नटराज संगीत अकादमी परिसर में अस्थि कलश दर्शन के लिए रखा गया। पं. बिरजू महाराज के चित्र के आगे उनके चरण चिह्न रखे गए जो उनके निधन के बाद पांव में आलता लगा कर लिए गए थे। चरण चिह्न के आगे कलश में उनकी अस्थियां रखी गई थीं। अस्थि कलश विसर्जन के लिए निकली यात्रा में पं. बिरजू महाराज के शिष्य और परिजनों की उपस्थिति रही।
सिगरा से अस्सी घाट तक लाने के लिए अस्थि कलश को फूलों से सजे खुले वाहन पर रखा गया। रास्ते भर गुलाब की पंखुड़ियां बरसाकर कलासाधक की अंतिम यात्रा को अश्रुपूर्ण नमन किया गया। उनके पुत्र पं. जयकिशन महाराज, रागिनी महाराज, त्रिभुवन महाराज और विशाल कृष्ण उसी वाहन पर बैठे। जैसे ही लोगों ने प्रस्थान किया पं. बिरजू महाराज की आवाज वातावरण में गूंज उठी।
बिरजू महाराज की आवाज में उनका प्रिय दादरा ‘वाण छवि बृज श्याम सुहाए’ सुनते ही सबकी आंखें नम हो उठीं। इसके बाद ‘झूलत राधे नवल किशोर...’, ‘सांवरा गिरधर मोरे मन भाए...’, ‘प्रकटे बृज नंददाल’ के अलावा बिंदादीन महाराज की रचित ठुमरी, दादरा ने पं. बिरजू महाराज की उपस्थिति का अहसास कराया।
अस्थि कलश पर पुष्प अर्पित
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कथक सम्राट पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज की अस्थि कलश यात्रा में लोगों को उम्मीद थी कि काशी के कलाकारों के साथ ही कला के कद्रदान भी अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए शामिल होंगे। गिने-चुने कलाकारों को छोड़ दें तो बनारस घराने के ही कई कलाकार अंतिम कलश यात्रा से नदारद रहे। महाराज को सोशल मीडिया पर शोक संदेशों की झड़ी लगाने वाले संगीत के सेवक भी अस्सी घाट तक नहीं पहुंच सके।
पंडित बिरजू महाराज की अस्थियां गंगा में विसर्जित
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कथक सम्राट का अस्थि कलश शुक्रवार की देर रात ही बनारस पहुंच गया था। उनके पुत्र जयकिशन महाराज ने बताया कि पिताजी को को कुछ दिन पूर्व डायलिसिस के लिए अस्पताल में भर्ती कराया था, तभी अपनी छोटी बहू आरती से उन्होंने कहा था कि मुझे कुछ हो जाए, तो मेरी अस्थियां मेरे जन्म स्थान, मेरे घर जरूर ले जाना। उसके बाद गोमती और बनारस में मां गंगा के चरणों मे विसर्जित करना।
उनकी उसी अंतिम इच्छानुसार दो अस्थि कलश लखनऊ लाए गए थे। इसमें एक गोमती में विसर्जित किया गया तो दूसरा बनारस लाया गया है। पं. बिरजू महाराज को जितना लखनऊ से प्रेम था, उतना ही संगीत के शहर बनारस से। यहां उनकी ससुराल और समधियान दोनों ही है। उनका अक्सर ही बनारस आना होता था। यहां विभिन्न कार्यक्रमों में प्रस्तुति के साथ उन्होंने नटराज संगीत अकादमी में प्रशिक्षण भी दिया।