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पं.बिरजू महाराज और पंडित जसराज ने बाबा दरबार में पेश की भावांजलि

Fri, 06 Apr 2018 04:45 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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पंडित बिरजू महाराज - फोटो : अमर उजाला
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संकटमोचन संगीत समारोह की दूसरी निशा नृत्य एवं गायन के दिग्गजों के नाम रही। गुरुवार को जहां पंडित बिरजू महाराज ने कथक की ऊंचाइयों से सुधि श्रोताओं को अवगत कराया वहीं ख्याल गायक पंडित जसराज ने अपनी आवाज के जादू से मंदिर परिसर में मौजूद श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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इसके अलावा धारवाड़ के विजय पाटिल ने अपने गायन और मुंबई के विवेक सोनार ने बांसुरी की रागिनियों से तान छेड़कर महोत्सव को रोमांचित कर  दिया।
गुरुवार को संकटमोचन संगीत समारोह की दूसरी निशा का श्रीगणेश बिरजू महाराज के शिष्यों रागिनी व त्रिभुवन ने हनुमान लला की वंदना पर तीन ताल में पारंपरिक कथक से किया।

टुकड़ा, तोड़ा, परन, तिहाई और रेला की प्रस्तुति से नृत्य के विभिन्न स्वरूपों को पेश किया। इसके बाद कथक सम्राट बिरजू महाराज ने जब मंच संभाला तो युवा कलाकारों की भांति उनकी चपलता सभी को मुग्ध कर गई। 80 वर्ष से अधिक की अवस्था में भी जिस लयबद्धता के साथ उन्होंने कथक की प्रस्तुति दी वह देख दर्शक हर-हर महादेव का जयघोष करने से स्वयं को नहीं रोक सके।
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कथक सम्राट ने ठुमरी तीन ताल में तिहाई और परन को पेश किया। समापन उन्होंने मयूर गत से किया। इसमें उन्होंने बिजली की गरज, बरसात की धुन को सधे हुए अंदाज में पेश किया। इसके बाद ख्याल गायक पंडित जसराज ने जब मंच संभाला तो मंदिर परिसर श्रोताओं से खचाखच भरा हुआ था।

दर्शकों ने हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ उनका अभिवादन किया। संकट मोचन के इतिहास में पहली बार रात का राग गाने मंच पर आए ख्याल गायक पंडित जसराज ने राग जै जैवंती में विलंबित एक ताल में निबद्ध रचना मां मोहे दरश देत क्यों नाहीं...से सुरों की तान छेड़ी।

इसके बाद उन्होंने राग बसंत में मध्य लय तीन ताल में निबद्ध और राग सब बने बाराती दूल्हा राग बसंत..सुनाया तो पूरा मंदिर परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। आलाप के बाद उन्होंने समापन हनुमान लला मेरे प्यारे लला...भजन गाकर किया।

दूसरी निशा की तीसरी प्रस्तुति में धारवाड़ के कलाकार और गुरुकुल परंपरा के संवाहक गायक विजय पाटिल ने मंच संभाला। दादा गुरु संघमेश्वर महाराज और गुरु कैवल्य महाराज की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए विजय धारवाड़ ने दक्षिण भारतीय शैली के अप्रचलित राग गावती में विलंबित एक ताल में निबद्ध रचना धन धन भाग से शुरूआत की।

अगली प्रस्तुति में द्रुत तीन ताल में निबद्ध धिन धिन का अंत न लोगों...पेश किया और समापन उन्होंने द्रुत एक ताल में निबद्ध गूंद लाओ मलिनिया...से किया।

चौथी प्रस्तुति में बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया के शिष्य विवेक सोनार ने संकटमोचन के दरबार में हाजिरी लगाई। राग चंद्र कौस में आलाप, जोड़, झाला से शुरूआत करते हुए उन्होंने नव मात्रा में मध्य लय में गत बजाई। द्रुत तीन ताल में एक गत के बाद उन्होंने द्रुत तीन ताल में तबले पर सवाल जवाब से दर्शकों को रोमांचित कर दिया। 
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गुलजार हुआ कला दीर्घा का एक और कोना

रागिनी व त्रिभुवन - फोटो : अमर उजाला
भारतीय गणराज्य के तूलिका प्रहरी शीर्षक से विशाल चित्र शृंखला की तैयारी संगीत समारोह के दौरान शुरू हो गई। इस श्रृंखला में उन चित्रकारों के चित्र बनाए जा रहे हैं। जिन्होंने भारतीय चित्रकला को एक नया आयाम देने के लिए संघर्ष किया है। इसमें पुरातन काल के चित्रकारों से लेकर आधुनिक युग के चित्रकारों तक करीब  200 ऐसे चित्रकारों के चित्र बनेंगे जिन्होंने भारतीय चित्रकला को विश्वव्यापी पहचान दी है।

चित्र कृतियों को तैयार करने में मुख्य रूप से जिन कलाकारों का सहयोग मिल रहा है उनमें पूजा साहू, पंकज वर्मा, डॉक्टर सुनील विश्वकर्मा, डॉक्टर सुनील कुशवाहा, डॉक्टर गरिमा रानी, पंडित वेदप्रकाश मिश्र, और पूर्ण चंद्र उपाध्याय शामिल है। इसके अतिरिक्त बीएचयू, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ सहित नगर के विभिन्न कला संस्थानों और आनंद वन ग्रुप के कलाकार इस चित्र अभियान में हिस्सा ले रहे हैं।


नन्हे-मुन्ने बच्चों ने थामी आपकी तूलिका
संकट मोचन मंदिर परिसर में बनाई गई कला दीर्घा में आपकी तूलिका गुरुवार से शुरू हो गई।  20 मीटर लंबे कैनवास पर सभी को अपनी चित्रात्मक अभिव्यक्ति करने की आजादी थी । इसकी शुरुआत नन्हे-मुन्ने बच्चों की मंडली ने की।

वैशाली, विशाखा, अनूप, अंजलि, आयुष प्रीति, मोनी, आकांक्षा, सृष्टि और पीयूष ने मिलकर हनुमान जी के एक चित्र को आकार दिया। यह बच्चे एक दूसरे की सहायता करते हुए चित्र को आकार दे रहे थे कोई रंग का पुरवा लेकर खड़ा था तो कोई बार-बार आसपास के कलाकारों से दूसरे रंग लेकर आने और फिर उन्हें वहां तक पहुंचाने की जिम्मेदारी में लगा था।

वैशाली कला दीर्घा में लगाई गई एक चित्र कृति से हनुमान जी का चेहरा देख रही थी और बार-बार देख कर उस चेहरे को कैनवास पर उतारने की कोशिश कर रही थी।
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