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पंचायत चुनाव : प्रत्याशियों ने अब तक नहीं भेजा लेखा जोखा

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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जीतने के बाद प्रत्याशियों ने अब तक चुनावी खर्च का लेखा-जोखा नहीं भेजा है। जबकि इसके लिए डीएम कौशल राज शर्मा की ओर से 15 मई तक जमा करने का नोटिस भेजा गया था। आयोग के निर्देश के अनुसार तीन माह के अंदर खर्च का ब्योरा देना अनिवार्य होता है। इसके बाद जनप्रतिनिधियों की जमानत राशि जब्त करने का प्रावधान है।
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आयोग को सर्वाधिक आमदनी जमानत राशि से होती है। नियमों के तहत जमानत राशि बचाने के लिए वैध मत का 1/5वां हिस्सा प्राप्त करना होता है। इस जद के बाहर वाले सभी प्रत्याशियों की जमानत राशि जब्त कर ली जाती है। अधिकारियों का कहना है कि मुश्किल से दस प्रतिशत लोग ही जमानत राशि वापस लेते हैं, शेष लाखों रुपये जब्त कर लिए जाएंगे।
निर्वाचन कार्यालय पंचायत के सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी राजाराम वर्मा ने बताया कि जमानत राशि बहुत लोग वापस लेने नहीं आते हैं। जीतने वाले तो प्राय: ही जमानत राशि नहीं लेते हैं। हारने वाले भी तमाम कागजी प्रक्रिया के कारण व मुख्यालय तक दौड़ लगाने के चक्कर में उक्त धनराशि वापस लेने नहीं आते हैं। आयोग के निर्देश के तहत ग्राम प्रधान के सामान्य वर्ग के लिए दो हजार रुपये जमानत राशि जमा की जानी थी। वहीं महिला व आरक्षण श्रेणी के लोगों को एक हजार रुपये जमानत राशि देनी थी।
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इसी प्रकार जिला पंचायत सदस्य के लिए चार हजार रुपये व आरक्षित वर्ग के लिए दो हजार है। क्षेत्र पंचायत के लिए दो हजार रुपये तय किया गया था। इस पद हेतु आरक्षित वर्ग को उक्त राशि का सिर्फ आधा जमा करना था। चुनाव में लगभग 12 हजार प्रत्याशियों ने विभिन्न पदों पर चुनाव लड़ा था।
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