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ऑक्सीजन प्लांट तो लग गया, टेक्नीशियन की तैनाती नहीं

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कोरोना की संभावित तीसरी लहर की अगले महीने से आशंका जताई जा रही है। ऐसे में जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो कोविड अस्पताल बने हैं, ऑक्सीजन प्लांट भी लगाए जा चुके हैं। चिकित्सकों, कर्मचारियों की तैनाती का भी दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत इससे परे है। अगर ऑक्सीजन प्लांट की बात करें तो अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर लगे प्लांट को चलाने के लिए कई जगहों पर स्थायी रूप से टेक्नीशियन की तैनाती नहीं हो पाई है।
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जिले में इस समय कुल 23 जगहों पर ऑक्सीजन प्लांट लगे हैं। इसकी क्षमता करीब 13 हजार लीटर प्रति मिनट है, इसके माध्यम से करीब 1700 बेड को 24 घंटे ऑक्सीजन मिल सकती है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला की पड़ताल में जो हकीकत सामने आई, वो बेहद चौंकाने वाली रही। इसमें स्वास्थ्य केंद्रों पर ऑक्सीजन पाइप लाइन बेड तक मिली। ट्रांसफार्मर भी लग गया है, लेकिन संचालन के लिए स्थायी कर्मचारी न होने की वजह से जैसे-तैसे स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है।
केस 1 : सीएचसी मिसिरपुर
सीएचसी मिसिरपुर में 30 बेड है और यहां ऑक्सीजन प्लांट लगा है। बेड तक ऑक्सीजन पाइप लाइन भी लग गई है, लेकिन प्लांट संचालन के लिए टेक्नीशियन नहीं है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरबी सिंह के मुताबिक, टेक्नीशियन न होने की वजह से स्वास्थ्य केंद्र के दो कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है।
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केस-2 :
सीएचसी चोलापुर में 60 में से 30 बेड पर ऑक्सीजन की सुविधा दी गई है। यहां प्लांट लगकर तैयार है। इसका ट्रायल भी हो चुका है। हकीकत यह है कि प्लांट संचालन के लिए टेक्नीशियन नहीं है। इस वजह से जरूरत पड़ने पर समस्या खड़ी हो सकती है।
अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर ऑक्सीजन प्लांट लगाने के साथ ही उसका ट्रायल भी पूरा हो चुका है। जरूरत के हिसाब से स्थायी टेक्नीशियन की तैनाती की प्रक्रिया भी चल रही है। स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को प्रशिक्षित कर प्लांट चलवाया जा रहा है। फिलहाल किसी तरह की कोई समस्या नहीं आने पाएगी। -डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ
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