वाराणसी। इस सीजन में धान की पराली (पुआल) जलाने पर किसानों को जेल जाने की नौबत नहीं आएगी। जिले में पहली बार किसानों को निशुल्क डी कंपोजर देने की तैयारी है। इसे किसानों को निशुल्क दिया जाएगा। पराली से जैविक खाद बनने से पैदावार भी बढ़ेगी।
कृषि विभाग 3300 यूनिट डी कंपोजर (सूक्ष्म जीवों का तरल) के लिए हरियाणा की एक कंपनी को आर्डर कर दिया है। जिसके लिए दो माह पहले निविदा निकाली गई थी। एक यूनिट 200 ग्राम का होगा तरल होगा जिससे 200 लीटर पानी में घोल तैयार कर किसान पराली को जलाने के बजाए उसे खेत में ही नष्ट कर सकेंगे, जो अगली फसल में जैविक खाद के रूप में काम भी करेगी।
पिछले साल पराली जलाने के आरोप में एक किसान को मिर्जामुराद पुलिस प्रदूषण फैलाने के आरोप में पकड़ कर ले गई थी जिसे बाद चेतावनी देकर छोड़ दिया था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा किसानों को इस बार पराली जलाने की नौबत ही नहीं आएगी। इसके लिए कृषि विभाग ने जिले के 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में तैयार धान की फसल के हिसाब से 3300 यूनिट डी कंपोजर का आर्डर किया है। जिसकी सप्लाई कंपनी माह तक शुरू कर देगी। एक यूनिट में 200 एमएल डी कंपोजर होगा जिससे 200 लीटर पानी में घोल बनाकर एक एकड़ में छिड़काव किसान कर सकेंगे। जिसके सूक्ष्म जीव एक पराली को खेत ही नष्ट कर जैविक खाद में तबदील कर देंगे। जिससे किसानों को पराली जलाने की जरूरत ही नहीं पडे़गी।
वर्जन
पराली प्रबंधन के तहत इस सीजन 3300 यूनिट डी कंपोजर का आर्डर किया गया है। जल्द ही कंपनी सप्लाई करेगी। इससे पहले ऐसे इलाकों की पहचान कर सूची तैयार की जा रही है जहां किसानों को पराली जलाना पड़ता है। किसानों कर पहचान कर उन्हें निशुल्क डी कंपोजर मुहैया कराया जाएगा। - अखिलेश कुमार सिंह, उपनिदेशक कृषि