महाश्मशान हरिश्चंद्र घाट पर गंगापुर के कोरोना पीड़ित का शव आने पर रविवार को अफरातफरी मच गई। शव आते ही मुखाग्नि देने से इनकार कर डोम परिवार घाट छोड़कर भाग गया। साथ ही प्राकृतिक शवदाह गृह कर्मियों ने भी शव जलाने से इनकार कर दिया। इसके बाद निगम के आला अफसरों के फोन आने और चौकी इंचार्ज के हस्तक्षेप के बाद शव का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान लगभग एक घंटे से अधिक समय तक शव पड़ा रहा।
गंगापुर के व्यापारी की तीन अप्रैल को बीएचयू में मौत हो गई थी लेकिन कोरोना जांच रिपोर्ट नहीं आई थी। रविवार को आए रिपोर्ट में वह कोरोना संक्रमित पाया गया। इसके बाद हड़कंप मच गया। शाम को साढ़े चार बजे हरिश्चंद्र घाट पर शव आने पर जैसे ही सूचना मिली कि शव कोरोना पीड़ित का है, तो लोग भाग खड़े हुए।
घाट पर रविवार को डोम राजा परिवार के छोटे लाल चौधरी की पारी थी। घाट पर बैठे उनके घर के लोग भी भाग गए। घरवालों का कहना है कि कोरोना संक्रमित का शव आने पर उनके परिवार के लोगों में भी संक्रमण हो सकता है। ऐसे में मुखाग्नि के लिए आग देने के दौरान उन्हें भी संक्रमण हो सकता है। इस डर से वे घाट छोड़कर भाग गए। उन्होंने जिला प्रशासन से इसकी व्यवस्था करने की मांग की है।
उधर, आसपास के कुछ लोग घाट के किनारे स्थित पार्षद राजेश यादव चल्लू के आवास पर आ गए कि कोरोना के पीड़ित का शव यहां न जलवाएं। उनका कहना है कोरोना पीड़ित का शव यहां आने से लोगों में संक्रमण हो सकता है। उनका कहना है कि शवदाह गृह में जले शवों का अवशेष चिमनी के माध्यम से उनके छतों पर आता है। ऐसे में कोरोना पीडि़त के शवों का अवशेष भी आ सकता है। उनका कहना है कि लाश को जलाने के लिए जिला प्रशासन को दिशा-निर्देश जारी करना चाहिए जिससे आसपास के लोग संक्रमित न हो।