जलीय जीवों का शिकार गंगा के लिए खतरनाक है। इस कारण भी गंगा में प्रदूषण बढ़ रहा है। शिकारी छोटी मछलियां, कछुए और घड़ियालों तक को मार दे रहे हैं।
यह कहना है गंगा स्वच्छता के अभियान पर निकले भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के टीम लीडर कमांडेंट सुरिंदर खत्री का। सुरिंदर के नेतृत्व में सोमवार की दोपहर आईटीबीपी के 46 जवानों का दूसरा राफ्टिंग दल गंगा के रास्ते अस्सी घाट पहुंचा।
देवप्रयाग से गंगासागर तक गंगा स्वच्छता का संदेश लेकर निकले आईटीबीपी के जवानाें का अस्सीघाट पर नगर निगम के अधिकारी अविनाश कुमार ने स्वागत किया।
सुरिंदर खत्री ने कहा कि कानपुर से बनारस तक के सफर में महीन जाली से गंगा में धड़ल्ले से शिकार किया जा रहा है। जलीय जीवों के शिकार पर रोक के लिए टीम बनाकर दिन-रात पेट्रोलिंग की जानी चाहिए।
ताकि जलीय जीवों को बचाया जा सके। जीवों को संरक्षित करके गंगा को प्रदूषित होने से काफी हद तक बचाया जा सकता है। सैकड़ों नाले गंगा में गिर रहे हैं, जो जल को जहरीला बना रहे हैं।
डिप्टी टीम लीडर तरुण कुमार ने बताया कि कानपुर के बिठूर घाट पर नाविक घाट की सफाई तो करते ही हैं, रात में निगरानी भी करते हैं। इस तरह के प्रयास और जगहों पर हों तो स्थिति में सुधार आए।