हृदयाघात यानी हार्ट अटैक से बचाव के लिए अब सिर्फ एक इंजेक्शन काफी होगा। ये इंजेक्शन अगर गोल्डन पीरियड में लग गया तो लोग दिल के दौरे से बचे रहेंगे। इस इंजेक्शन को सरकारी अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्रों पर लाने की तैयारी की जा रही है ताकि सरकारी अस्पताल में इलाज कराने वालों को भी ये सुविधा मिल सके।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की ओर से वाराणसी में इस नए प्रोजेक्ट को शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इस प्रोजेक्ट के लिए आराजीलाइन, पिंडरा, सेवापुरी, बड़ागांव और हरहुआ ब्लॉक को चुना गया है। इसके अलावा जिला व मंडलीय अस्पताल में ये सुविधा प्रदान की जाएगी।
बीएचयू के कार्डियोलॉजी विभाग के हेड डॉ. धर्मेंद्र जैन ने सीएमओ कार्यालय में हुई बैठक के दौरान इस प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी दी। इसके साथ ही इस प्रोजेक्ट के लिए सीएमओ डॉ. वीबी सिंह व ब्लॉक के चिकित्साधिकारियों से सहयोग की अपील की है।
देश के दस जिलों में उपलब्ध कराई जा रही दवा
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डॉ. धर्मेंद्र जैन ने बताया कि हृदय की मांसपेशियों में होने वाले आघात को मायोकार्डियल इंफार्क्शन कहा जाता है, जिसमें हृदयाघात के मरीजों को एक घंटे के अंदर यानी गोल्डन पीरियड के दौरान थ्रोम्बोलेटिक एजेंट (थक्का घोलने वाले दवा) दी जानी चाहिए।
ये इंजेक्शन थ्रोम्बोलेटिक एजेंट का काम करेगी। ये दवा अभी देश के दस जिलों में उपलब्ध कराई जा रही है, जिसमें वाराणसी भी शामिल हैं। बीएचयू हृदयरोग विभाग में ये दवा उपलब्ध कराई जा रही है। जल्द ही जिले सभी ब्लॉक व राजकीय जिला अस्पतालों में भी ये उपलब्ध होगी।
बताते चलें कि छाती में दबाव या जकड़न। छाती, पीठ, जबड़े और ऊपरी शरीर के अन्य हिस्से में दर्द जो कुछ मिनट से अधिक रहता है फिर फैलता है। सांस लेने में दिक्कत, पसीना आना, जी मचलाना, उल्टी आना, खांसी आना, सिर चकराना। ये सभी दिले के दौरे के लक्षण हैं।