वाराणसी। अवैैध निर्माणों को वैध करने के लिए सरकार की शमन नीति नियमों के पाबंदियों में अटक गई है। जिसकी वजह से शमन के अब तक महज 70 नक्शे ही जमा हो पाए हैं। जबकि हजारों अवैध निर्माण विकास प्राधिकरण की ओर से चिन्हित हैं।
दरअसल, शमन मानचित्र में प्रस्तावित नक्शे का विकल्प खत्म होने से प्राधिकरण के राजस्व में गिरावट आई है। लोग उसे जमा करने में भी कम रुचि ले रहे हैं। वर्तमान में जारी शासनादेश में शमन नीति 2010 को तो लागू किया गया है, लेकिन जितना निर्माण हुआ है, उतना ही शमन हो सकता है। जबकि पुरानी व्यवस्था में निर्माण के अलावा प्रस्तावित नक्शा भी पास करने का विकल्प था। ऐसा होने से एक बार में ही वीडीए को पूरे प्रस्तावित भवन का भी राजस्व मिल जाता था और भवन स्वामी भी खुश रहता था। उन्हें बार-बार वीडीए कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ता था। वीडीए वीसी ईशा दुहन का कहना है कि शासन की नीति के अनुसार नक्शे जमा कराए जा रहे हैं।
दीवार खड़ी पर छत का देना होगा दूसरा नक्शा
ऑफलाइन जमा हो रहे शमन के नक्शे में कई खामियां बताई जा रही हैं। अगर कोई भवन स्वामी छत ढालने तक कॉलम खड़ा किया और छत नहीं ढाल पाया है तो वर्तमान शमन नीति के तहत केवल कॉलम का ही शमन होगा। ऐसे स्थिति में भवन स्वामी इस नीति को सही नहीं मान रहे हैं। साथ ही नक्शा जमा करने से कतरा रहे हैं।