बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के वार्षिकोत्सव पर दिया गया एक साल का ब्योरा
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बीएचयू में कृषि विज्ञान संस्थान के वार्षिक समारोह में खेती-बाड़ी से जुड़े इनोवेशन पर चर्चा हुई। समारोह में प्रोफेसर, विद्यार्थी, शोधार्थी, पुरातन छात्र और विशिष्ट अतिथि पहुंचे। कार्यक्रम की शुरुआत कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक और संकाय प्रमुख प्रो. यूपी सिंह ने की। उन्होंने बताया कि सत्र 2025-26 में संस्थान के वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने 312 शोध पत्र, 77 पुस्तक अध्याय और 11 पुस्तकों का प्रकाशन किया। संस्थान को लगभग 35 करोड़ रुपये के 20 रिसर्च प्रोजेक्ट भी मिल चुके हैं और 10 पेटेंट दाखिल किए गए, जिनमें से सात स्वीकृत हो चुके हैं।
प्रो. सिंह ने कहा कि कृषि संस्थानों की एनआईआरएफ रैंकिंग में संस्थान ने चौथा स्थान हासिल किया। संस्थान को कृषि अनुसंधान में बेहतर योगदान के लिए क्लैरिवेट इंडिया रिसर्च एक्सीलेंस साइटेशन अवॉर्ड 2025 सहित कई सम्मान मिले। मालवीय निधि सरसों, मालवीय मनीला सिंचित धान-1 और मालवीय धान 105 सब-1 सहित कई नई और उन्नत प्रजातियां संस्थान ने विकसित कीं।
गोट गुरु और कैटल गुरु द्विभाषी मोबाइल एप विकसित
प्रो. सिंह ने बताया कि शून्य जोताई, धान की सीधी बोआई, पोषक तत्व प्रबंधन और कीट प्रबंधन जैसी तकनीक को कई राज्यों में बढ़ावा दिया गया है। इन तकनीक से लागत में कमी और पर्यावरण संरक्षण में सहायता मिल रही है। पशुपालकों के लिए गोट गुरु और कैटल गुरु नाम के द्विभाषी मोबाइल एप्लीकेशन भी विकसित किए गए हैं। इनके माध्यम से पशुपालन से संबंधित कई जानकारियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही हाईटेक भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक के माध्यम से साहीवाल नस्ल के छह स्वस्थ बछड़ों का सफल जन्म भी कराया गया।
अध्यादेश सहित दो किताबों का लोकार्पण
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान संस्थान और कृषि विज्ञान केंद्र की प्रतिवेदन रिपोर्ट और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 आधारित अध्यादेश का लोकार्पण भी किया गया। यह अध्यादेश शैक्षणिक प्रशासन के लिए एक बेहतर फ्रेमवर्क देगा। उद्यान विज्ञान विभाग के डॉ. अनिल कुमार सिंह की किताब फूलों की वैज्ञानिक खेती का भी लोकार्पण किया गया। हिंदी भाषा में लिखी गई यह किताब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पाठ्यक्रम के लिए तैयार की गई है। पुस्तक की भूमिका कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने लिखी है। इस दौरान प्रो. अमिताव रक्षित, प्रो. अभिषेक सिंह और डॉ. पुष्यमित्र त्रिवेदी के संयोजन में पुरस्कार वितरण समारोह हुआ। इसमें विद्यार्थियों, प्रोफेसरों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। लगभग 4000 पुरातन छात्रों के सहयोग से आभा अतिथि गृह का निर्माण किया गया है।