तीन लाख पौधरोपण करके गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
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परियोजना के तीसरे वर्ष आम, अमरूद, पपीता, अनार जैसे फलदार पेड़ और अश्वगंधा, शतावरी, गिलोय, एलोवेरा जैसे औषधीय पौधे तथा गुलाब, चमेली और पारिजात के फूलों से राजस्व आरंभ होगा। तीसरे वर्ष निगम को दो करोड़ रुपये, पांचवें वर्ष पांच करोड़, छठे वर्ष छह करोड़ और सातवें वर्ष तक सात करोड़ रुपये वार्षिक अनुमानित आय होगी।
सिंचाई के लिए पांच बोरवेल लगाए गए हैं। मार्च-जून के प्रचंड गर्मी में पौधों को पानी देने के लिए सप्ताह में तीन बार 45 मिनट का विशेष शेड्यूल तय किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार मार्च का पहला हफ्ता पौधरोपण के लिए सबसे अनुकूल है। मानसून से पहले पौधों की जड़ें जम जाएंगी और यह मिट्टी के कटाव को रोकने में मदद करेंगी।
अप्रैल-मई की गर्मी से पहले पौधे नए वातावरण में ढल जाएंगे। इस मियावाकी वन में बांस, कचनार, महुआ और हरसिंगार सहित कुल 27 प्रकार के देशी पेड़ शामिल हैं। शीशम और अर्जुन को प्राथमिकता दी गई है, जो नदी किनारे के वातावरण और अस्थायी जलभराव को सहन कर सकते हैं।