श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव व जय जगन्नाथ के जयघोष के साथ विग्रहों को गंगाजल से स्नान कराना शुरू कर दिया। पुजारी ने दोपहर में भगवान को भोग लगाकर आरती उतारी। इसके बाद फिर जलाभिषेक आरंभ हो गया। शाम को भोग आरती के बाद जलाभिषेक का सिलसिला जारी रहा। अत्यधिक स्नान के कारण प्रभु बीमार पड़ गए और स्वास्थ्य लाभ के लिए अज्ञातवास पर चले गए। पूरे पखवारे भर भगवान जगन्नाथ औषधीय काढ़े का ही सेवन करेंगे।
अब 14 से 29 जून तक भगवान जगन्नाथ मंदिर का पट बंद रहेगा। 30 जून को भगवान जगन्नाथ, बलराम जी व सुभद्रा जी स्वस्थ होने के बाद भक्तों को दर्शन देंगे। कोरोना संक्रमण काल के दो साल बाद रथयात्रा मेले की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस दौरान आलोक शापुरी, शैलेश शापुरी, संजय शापुरी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, अखिलेश खेमका, करुणेश खेमका, अरविंद सारस्वत, जगन्नाथ ओझा, रजत जायसवाल, विपिन ओझा, साक्षी साहनी, कृष्णा पांडेय, अभय सिंह मौजूद रहे।