वाराणसी। फुलवरिया फोरलेन के अतिक्रमण को हटाने के दौरान लापरवाही नहीं बरती गई होती तो शायद वृद्धा की जान बच जाती। स्थानीय लोगाें ने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि अतिक्रमण हटाने के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। यदि अतिक्रमण हटाने के बाद मलबा हटाया गया होता तो हादसा नहीं होता।
नियम है कि अतिक्रमण तोड़ने से पहले उस स्थान की जांच की जाए कि वहां कोई न हो। जांच पूरी होने के बाद ही अतिक्रमण हटवाया जाता है। किसी निर्माण को अधूरा नहीं तोड़ा जाता है। सुरक्षा के लिहाज से हिलने वाले निर्माण को गिरा दिया जाता है, ताकि हादसा न होने पाए। बावजूद इसके ऐसा नहीं किया गया। दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन से पहले अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया था। फुलवरिया फोरलेन के दायरे में आने वाले अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई बीते एक सप्ताह से चल रही है। कुछ लोगों ने स्वयं ही अपने अतिक्रमण तोड़े थे, लेकिन वहां से मलबा नहीं हटाया जा रहा है। उधर पीडब्ल्यूडी के अभियंता एसडी मिश्र ने कहा कि आज कोई अभियान नहीं चलाया गया। पिछले दिनों पीडब्ल्यूडी, पुलिस, प्रशासन ने मिलकर अभियान चलाया था। कुछ लोगों ने अपना मलबा उठाने की बात कही थी इसलिए छोड़ा गया था।
वरुणापार क्षेत्र में चला निगम का हथौड़ा
वरुणापार क्षेत्र में रविवार को नगर निगम की ओर से अतिक्रमण अभियान चलाया गया। इस दौरान पं. दीनदयाल उपाध्याय जिला चिकित्सालय के आसपास अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त किया गया। निगम के अतिक्रमण दस्ते ने एक दर्जन से अधिक अवैध निर्माण ढहाए। महावीर मंदिर से मानसिक चिकित्सालय और दीनदयाल अस्पताल के सामने से अतिक्रमण हटाया गया। नगर निगम की टीम को किसी भी तरह के विरोध का सामना नहीं करना पड़ा। इस दौरान अपर नगर आयुक्त, तहसीलदार और पुलिस टीम मौजूद रही।