लंबे समय के बाद पुराने दोस्त मिले तो पुरानी यादें भी तरोताजा हो उठीं। परिसर में कई मस्ती, साथ में बिताए लम्हे आंखों के सामने फिर से जी उठे। हर कोई पुरानी यादों के ताजा लम्हों को फिर से जी भर जीने को आतुर नजर आ रहा था। ललित कला विभाग का हर कोना साथ बिताए गए लम्हों की याद दिला रहा था। पुरातन छात्र समागम के आयोजन के बाद जब विदा हुए तो चेहरे पर फिर से मिलने की खुशी और बिछड़ने का गम साफ दिख रहा था।
रविवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के ललित कला विभाग में पुरातन छात्र समागम एवं संगोष्ठी का उद्घाटन कुलपति प्रो. एके त्यागी ने दीप जलाकर किया। कुलपति प्रो. त्यागी ने कहा कि ललित कला विभाग हमेशा अपने आयोजनों से सुर्खियों में विश्वविद्यालय में बना रहता है और मैं चाहता हूं कि ऐसे ही बना रहे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष ललित कला विभाग के अंतर्गत पीजी एवं यूजी पाठ्यक्रम के तहत नाट्य कला की पढ़ाई प्रारंभ हो रही है। मैं सभी ललित कलाओं से संबंधित सारे विषयों को मिलाकर एक संकाय बनाने की योजना बना रहा हूं जो जल्द ही मूर्त रूप लेगा।
विशिष्ट अतिथि पद्मश्री प्रो. राजेश्वर आचार्य ने पुरातन छात्रों को आशीर्वचन एवं शुभकामना व्यक्त की। आयोजन में पटना, लखनऊ, फैजाबाद, गोरखपुर, दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता से पुरातन छात्र-छात्राओं का समागम हुआ। पुरातन छात्र-छात्राओं ने एक दूसरे के साथ सेल्फी ली। दूसरे सत्र में ललित कलाओं के सामाजिक सरोकार एवं वर्तमान परिदृश्य पर संगोष्ठी आयोजित हुई। इस दौरान प्रो. प्रेमचंद विश्वकर्मा, नसीमुद्दीन अंसारी, प्रभाकर राय, उमा शंकर पांडेय, सरोज, आकांक्षा, आरती, डॉ. ओम प्रकाश गुप्ता, प्रतिमा, इफ्तिखार खान, डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा मौजूद रहे।