बाद के विवेचकों को न तो मुकदमे के संबंध में अच्छी जानकारी हो पाती है और न ही विवेचना के समयबद्ध विधिक निस्तारण में कोई रुचि लेते हैं। इसका एक और दुष्परिणाम यह भी है कि विवेचना र्कई वर्षों तक लंबित बनी रहती है। इस पर आईजी रेंज ने चारों जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया कि प्रत्येक शनिवार को किसी भी एक थाने पर जाकर विवेचना के निस्तारण का हाल देखेंगे।
इसमें एसपी, एएसपी और सीओ शनिवार को थाने पर जरूर जाएंगे। आईजी रेंज खुद किसी एक थाने पर पहुंचकर विवेचना निस्तारण करेंगे। वाराणसी परिक्षेत्र के चार जिलों वाराणसी ग्रामीण, चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर के पुलिस अधीक्षकों को पत्र के माध्यम से इस व्यवस्था लागू कराने का निदेश दिया गया है।
वाराणसी परिक्षेत्र आईजी रेंज के. सत्यनारायणा ने कहा कि प्रत्येक शनिवार की शाम विवेचना निस्तारण दिवस मनाया जाएगा। इसके तहत घटना के बाद जिस विवेचक द्वारा विवेचना शुरू की गई, उसी विवेचक द्वारा विवेचना को पूरा किया जाए। परिक्षेत्र के अंदर यदि उस विवेचक का उस थाने से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण हो जाता है, तब भी उस विवेचना को अपने साथ ले जाएंगे और निर्धारित समय में उसे पूरा करेंगे।
एक ही विवेचक द्वारा विवेचना करने से विवेचना में गुणवत्ता आएगी व उस मुकदमे के संबंध में विवेचक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी निर्धारित हो जाएगी। पुलिस उच्चाधिकारियों द्वारा विवेचनाओं की समीक्षा करने के साथ विवेचकों की कार्यकुशलता की भी समीक्षा होगी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान जिम्मेदार विवेचक ही उसकी पैरवी करेगा।
वर्तमान में ये आ रहीं दिक्कतें
वर्तमान में विवेचना की केस डायरी उसी थाने में इंट्री हो रही है, जहां मुकदमा पंजीकृत किया गया था। विवेचक के स्थानांतरण होने पर केस डायरी को सीसीटीएनएस में इंट्री करने के लिए विवेचक को पूर्व के थाने पर आना पड़ता है। इससे नियुक्ति के थाने पर समय देने में कठिनाई हो रही है। अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए पूर्व के थाने पर निर्भर रहना पड़ता है।