उन्होंने बताया कि ज्योतिष की पुस्तक ताजिक नीलकंठी के ग्रहाध्याय में मंगल, सूर्य, चंद्र ग्रहों से संबंधित धातुओं का वर्णन करते हुए मंगल की धातु ताम्र, सूर्य की स्वर्ण और चंद्र की धातु रजत को बताया गया है।
इस आधार पर र की धातु ताम्र, आ की स्वर्ण और म की रजत होगी। इसमें र, आ, म वर्णमाला के सदस्य हैं वहीं ताम्र, स्वर्ण और रजत पीरियाडिक टेबल के सदस्य हैं। इसीलिए ग्रहों की शक्ति को बढ़ाने के लिए या ज्योतिषीय उपचार में ग्रहों से संबंधित धातुओं के धारण करने का परामर्श दिया जाता है। इसके साथ ही ईश्वर के विभिन्न नामों या मंत्रों के जप का विधान है।
आयुर्वेद में धातुओं की भस्म से कठिन से कठिन और असाध्य रोगों की चिकित्सा की जाती है। राधेश्याम शर्मा ने बताया कि अक्षर, मंत्र, धातुएं, ग्रह और शरीर सभी ऊर्जा या चेतना के स्तर पर समरूप हैं। इस पर अभी और शोध करने की आवश्यकता है। इसका उपयोग भाषा विवाद और सभ्यताओं के संघर्ष को हल करने में मदद मिलेगी।
वैदिक सनातन धारा में दो महान उपासना ग्रंथ हैं। इसमें पहला श्री दुर्गा सप्तशती और दूसरा श्री रुद्राष्टाध्यायी है। दुर्गा सप्तशती में मां जगदंबा की एवं रुद्राष्टाध्यायी में शिव की उपासना। निश्चित रूप से दुर्गा पाठ से ग्रह पीड़ा शांत हो जाती है। अतः प्रत्येक नवरात्र में विधिपूर्वक नवचंडी पाठानुष्ठान करना चाहिए। बड़े रूप में ग्रह बाधा का सामना करना पड़ रहा हो तो शतचंडी पाठ करना चाहिए।
यह कहना है श्री टीकमाणी संस्कृत कालेज के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ.आमोद दत्त शास्त्री का। उन्होंने बताया कि रुद्रीपाठ से भगवान शिव का अभिषेक करने से समस्त ग्रह बाधाएं नष्ट हो जाती हैं। पारद शिवलिंग पर दुग्ध मिश्रित जलधारा के साथ रुद्री पाठ करने से ग्रह शांति हो जाती है। कालसर्प दोष,पितृदोष,शनि दोष का शमन होता है।
1. सूर्य शांति के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ एवं सूर्य को तांबे के पात्र से अर्घ्य देना चाहिए।
2. चंद्र पीड़ा निदान के लिए सोमवार व्रत है।प्रत्येक सोमवार शिवलिंग पर दूध,जल,मिश्री मिलाकर चढ़ाने से चंद्र दोष नष्ट होता है।
3. मंगल पीड़ा निदान के लिए हनुमान चालीसा का पांच पाठ एवं हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ावें।
4. बुध पीड़ा निदान के लिए गणपत्थर्वशीर्ष का पाठ एवं 21 दूर्वा चढ़ाएं।
5. गुरु पीड़ा निदान के लिए नारायण कवच एवं प्रत्येक बृहस्पतिवार को विष्णु भगवान पर हल्दी चढ़ावें तथा केले का दान करें।
6. शुक्र पीड़ा निदान के लिए देवी कवच एवं दुर्गा चालीसा। हर शुक्रवार को किसी देवी मंदिर में गुलाब चढ़ावें।
7. शनि पीड़ा निदान के लिए शनिवार को शाम 5 से 7 बजे तक पीपल वृक्ष में तिल के तेल का दीपक जलाएं एवं गरीब को सफेद मीठा खिलाएं।
8. राहु पीड़ा निदान के लिए पारद शिवलिंग पर अभिषेक एवं सर्प जोड़े भगवान शिव को अर्पण करें।
9. केतु पीड़ा निदान के लिए श्री गणेश जी की पूजा एवं भैरव सहस्त्रनाम का पाठ करें तथा कुत्ते को पूआ खिलाएं।