ओबरा और दुद्धी विधानसभा सीट को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिकाएं हाईकोर्ट ने खारिज कर दी हैं।
न्यायमूर्ति वीके शुक्ला और संगीता चंद्रा की बेंच ने बुधवार को 60 पेज में सुनाए गए निर्णय में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 324 और 327 के तहत जारी अध्यादेश में चुनाव आयोग को जो अधिकार दिए गए हैं, वह उसके लिए पर्याप्त हैं।
दुद्धी के पूर्व विधायक चंद्रमणि प्रसाद, आशुतोष शुक्ल, अजय कुमार एवं अन्य ने ओबरा-दुद्धी सीट को एसटी के लिए आरक्षित किए जाने के विरुद्ध याचिका दाखिल की है। चारों मामलों की एक साथ सुनवाई की गई।
चुनाव आयोग का कहना था कि वर्ष 2013 में केंद्र की तरफ से जारी अध्यादेश में चुनाव आयोग के पास इस बात के पर्याप्त अधिकार हैं कि वह जरूरी प्रक्रिया पूरी करते हुए अनुसूचित जनजाति की आबादी के अनुपात में सीटें आरक्षित करें और इन दोनों सीटों के निर्धारण में इसे अपनाया गया है।
वहीं, याचिकाकर्ताओं का कहना था कि संविधान के अनुच्छेद 82 और 170 के तहत किसी भी अध्यादेश को मूर्तरूप लेने के लिए राष्ट्रपतीय आदेश जरूरी है, जो नहीं मिला है। चुनाव आयोग ने राष्ट्रपतीय आदेश मिलने की बात स्वीकार भी की।
पारित निर्णय में कोर्ट का कहना है कि चुनावी कार्यक्रम जारी हो चुका है।
अध्यादेश में चुनाव आयोग को इसके लिए अधिकार भी मिले हुए हैं, इसलिए रिट खारिज की जाती है।
सुप्रीम कोर्ट में भी इसी मसले पर पंकज मिश्रा एवं अन्य ने याचिका दाखिल की है। अधिवक्ता शेखर जी देवासा ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्णय का अध्ययन किया जा रहा है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में इसको दृष्टिगत रखते हुए अपना पक्ष रखा जाएगा।