ऑनलाइन पढ़ाई... दूरदर्शन... ऑफलाइन एप... पढ़ने-पढ़ाने के इंतजाम ढेरों, लेकिन यह नहीं पता कि बच्चे पढ़ भी रहे हैं या नहीं। बिना स्कूल जाए और ऑनलाइन पढ़ाई कर बच्चों का मन भी नहीं लग रहा। ऐसे में बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने नया रास्ता निकाला है। छोटे-छोटे व्हाट्सएप टेस्ट के माध्यम से बच्चों का मूल्यांकन (टेस्ट) होगा और सुधार के लिए सामग्री भेजी जाएगी। सरकार की तरफ से बहराइच व श्रावस्ती में चले पायलट प्रोजेक्ट के तहत बच्चों में 50 फीसदी सुधार पाया गया और उनका पढ़ाई की तरफ रुझान भी बढ़ा। अब इसे बनारस में लागू किया जा रहा है।
कक्षा 6 से आठ तक पूरक कक्षाएं
बतौर पायलट प्रोजेक्ट सरकार की तरफ से कक्षा छह से आठ तक की पूरक कक्षाएं ( रेमिडियल क्लास) चल रही हैं। बच्चों के लिए कन्वेजीनियस संस्था ने व्हाट्सएप की मदद से निर्धारित पाठ्यक्रम पर आधारित अभ्यास करवाया। इसे साप्ताहिक तौर पर किया गया और मूल्यांकन में जो कमियां आई उनके हिसाब से बच्चों को रिमेडियल सामग्री भेजी गई। संस्था एक इंपैक्ट डैशबोर्ड भी तैयार करेगी, ताकि बच्चों के सीखने का स्तर (लर्निंग मीट्रिक्स) स्कूलवार, ब्लॉकवार व जिलेवार देखा जा सकेगा।
पहली से पांचवीं कक्षा तक रॉकेट लर्निंग
कक्षा 1 से 5 तक विभाग रॉकेट लर्निंग पर काम कर रहा है। इसमें भी व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से दो से तीन मिनट के अभ्यास भेजे जाएंगे। पूरे हफ्ते पाठ्यसामग्री पर दो से तीन मिनट के वीडियो या एक्टिविटी करवाने के बाद बच्चों की प्रतिक्रिया ली जाती है। फिर सप्ताह के आखिर में टेस्ट लिया जाता है। टेस्ट के बाद रिमेडियल सामग्री भेजी जाती है। हफ्ते के अंत में संस्था बच्चों को सर्टिफिकेट देती है और उनका वीडियो बनाकर डालती है।
कोरोना काल में बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना बड़ी चुनौती है। विभाग अलग-अलग प्रयोग कर बच्चों के सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को जारी रखने के लिए अब व्हाट्सएप पर शिक्षण सामग्री भेजकर उनका मूल्यांकन करने की पहल कर रहा है।
- राकेश सिंह, जिला बेसिक अधिकारी