जल निगम ने पेयजल आपूर्ति दुरुस्त करने के लिए टूटी पाइप लाइनों की मरम्मत और पाइप लाइन को शिफ्ट करने के लिए सेतु निगम और रेलवे से पैसा मांगा है। पैसा मिलने पर ही अंधरापुल और कैंट रोडवेज के सामने क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को दुरुस्त कराने केसाथ ही पाइप डायवर्जन का काम किया जाएगा। जल निगम के एक्सईएन सुरेंद्र कुमार ने कहा कि पैसे के लिए पत्राचार किया जा रहा है। ऐसे हालात में कमिश्नर के निर्देश के बावजूद शनिवार से मरम्मत का काम शुरू होने की संभावना नहीं है।
कैंट रेलवे स्टेशन के सामने बन रहे फ्लाईओवर का एक पिलर जल निगम की पेयजल पाइपलाइन पर आ रहा है। पाइप लाइन को डायवर्ट करने के लिए लगभग 200 मीटर तक 1200 व्यास की पाइप लाइन लगाई जानी है। वहीं अंधरापुल चौड़ीकरण के दौरान जल निगम की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। उस दौरान जल निगम ने रेलवे से इसके निर्माण के लिए 35 लाख रुपये का मुआवजा इसके निर्माण के लिए मांगा था। पैसा न मिलने के कारण यह काम भी रुका हुआ है। काम पूरा होने पर पेयजल समस्या खत्म हो जाएगी।
कमिश्नर ने गुरुवार को विभागीय अधिकारियों को तीन शिफ्ट में काम कराके फ्लाईओवर, पुल और आरओबी के निर्माण कार्य को पूरा कराने की हिदायत दी थी। शुक्रवार को कहीं भी तीन शिफ्ट में काम होता नहीं दिखा। शुक्रवार को दिन में 12:30 मंडुवाडीह आरओबी के पास काम होता नहीं दिखा। सामने घाट में भी दोपहर 1:30 बजे काम नहीं हो रहा था। शाम चार बजे के बाद काम कराया जा रहा था। सेतु निगम, रेलवे, पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने बताया कि दोपहर में तेज धूप के चलते मजदूर काम नहीं करते हैं। फिलहाल, शाम पांच बजे से सुबह 10 बजे तक काम कराया जा रहा है।
मंडुवाडीह रेलवे ओवरब्रिज को पूरा करने के लिए सेतु निगम ने सीवर लाइन की शिफ्टिंग के लिए सरकार से 40 लाख रुपये की मांग की थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ कमिश्नर की मीटिंग में जल निगम के प्रस्ताव के आधार पर इसे संशोधित कर 90 लाख कर दिया है। सेतु निगम को अभी तक फंड नहीं मिला है। काम को 30 जून तक पूरा करने के लिए सेतु निगम के पास फंड डायवर्जन के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है। सेतु निगम के अधिकारियों की मानें तो आरओबी पर उसका कार्य लगभग पूरा हो गया है। रेलवे अपने हिस्से का काम पूरा कर दे तो उसकी ओर से फिनिशिंग का काम एक हफ्ते में पूरा हो जाएगा। इस बीच रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि 30 जून से पहले रेलवे अपने हिस्से का पूरा काम करा देगा।
जल परिवहन के लिए जमीन का अधिग्रहण करने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी को मिलने के बाद आईडब्ल्यूएआई के साथ ही प्रशासन के अधिकारी सक्रिय हो गए हैं। जमीन के अधिग्रहण में रोड़ा बने एक बड़े काश्तकार से भी प्रशासनिक अधिकारी मिलेंगे। गंगा में वाराणसी होते हुए इलाहाबाद से हल्दिया तक जल परिवहन शुरू करने के लिए सेकेंड फेज में रामनगर के राल्हूपुर में तैयार हो रहे मल्टी मॉडल टर्मिनल को जिउनाथपुर रेलवे स्टेशन से जोड़ा जाना है। इसके लिए जमीन 28 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। 10 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन का अधिग्रहण हो चुका है।