सहालग शुरू होते ही दूल्हे के सिर पर सजने वाले मौर, शाही पगड़ियों से बाजार सज गए हैं। दूल्हे की शेरवानी से लेकर दूल्हनों के लिए लहंगा-चुनरी की एक से बढ़कर एक रेंज उतार दी गई है। लॉन, होटल, बग्घियां सजाने, बैंडबाजा, शहनाई की मंगलध्वनि पर रिश्तेदारों, संगी-यारों, सहेलियों, समधी-समधन के साथ थिरकने की तैयारियां भी हो चुकी हैं लेकिन नोटबंदी के चलते वर-वधू पक्ष के लोग खुशियों में कटौती करने के लिए मजबूर हैं। एक तरफ कैश की किल्लत को देखते हुए जहां लॉन संचालकों ने रेट घटा दिए हैं, वहीं मेहमानों की संख्या में भी कटौती की जा रही है, ताकि गाड़ी पार की जा सके।
सूर्य भगवान के उत्तरायण होने के बाद शुभ घड़ी के इंतजार की घड़ियां खत्म हो गईं। द्वारचार के लिए मंडप सजने लगे हैं। शहनाई की गंूज के बीच बैंडबाजा के साथ बारातें निकलेंगी लेकिन नोटबंदी के चलते बजट में कटौती से अब भी लोग उबर नहीं पाए हैं। चालू महीने संक्राति के दिन लग्न होने के बावजूद मृत्युबाण योग होने से सिंदूरदान की रस्म नहीं निभाई गई लेकिन सोमवार को दिवा लग्न में शादियां शुरू हो जाएंगी।
इस महीने 26 जनवरी तक 11 दिन शुभ लग्न है। इसी तरह एक फरवरी को वसंत पंचमी पर शादियों की धूम रहेगी। पांच फरवरी को महानंदा नवमी पर भी शादियां होंगी। आठ फरवरी को भी शुभ लग्न है। मार्च महीने में भी 10 से अधिक लग्न है। कैश की किल्लत बनी होने और बैंकों की ओर से सीमा न बढ़ाए जाने की वजह से सहालग के सीजन पर नोटबंदी का साया साफ दिखने लगा है। न्यौता भेजने में कटौती की जाने लगी है। लॉन संचालकों का कहना है कि बुकिंग में पेमेंट का संकट बना हुआ है। इस वजह से रेट घटा दिए गए हैं। इसी तरह बाराती और घराती भी मेहमानों की सीमित संख्या रखने पर जोर दे रहे हैं।