उद्योग-व्यापार में घाटे के बहाने कर्मचारियों को पैसा रोकने वालों का रुख बदल गया है। रद्दी बन चुके काले धन को कारोबारी ‘व्हाइट’ करने के लिए अपने कर्मचारियों और मजदूरों को कई-कई महीने का वेतन एडवांस में दे रहे हैं। एडवांस के साथ बोनस भी दिया जा रहा है। कुछ गद्दीदार और व्यापारी अपने कर्मचारियों को लाइन में लगाकर अपनी 500-1000 के पुराने नोट की गड्डियों को कम कर रहे हैं।
बैंकों और डाकघरों में पुराने नोट बदलने के लगने वाली लंबी कतार की वजह यही है। बुनकर और अन्य प्रकार के श्रमिकों की बड़ी संख्या लाइन में लग रही है। सरैयां के रफीक, आमिर, पुराना पुल के रमजान अली, मुनौव्वर ने बताया कि गद्दीदार या मालिकों द्वारा उन्हें
छह से आठ महीने की सैलरी एडवांस में दे दी गई है। वे लाइन में लगकर अपनी एडवांस कमाई को बाजार में चलने वाले नोट में बदलवा रहे हैं।
एडवांस में मिले पैसों को बदलने में पूरा परिवार लाइन में नजर आ रहा है। उन्हें तो बस इस बात की खुशी है कि जहां मालिक से केवल यह सुनने को मिलता है कि अभी पैसे नही है अगले महीने तुम्हारा पैसा देंगे, वह महीनों की सैलरी एडवांस में बांट रहे हैं।