बेसिक शिक्षा विभाग की वजह से हेडमास्टर भारी दबाव से गुजर रहे हैं। हेडमास्टरों से छात्रों के सत्यापन के साथ-साथ अभिभावकों के खातों की फीडिंग का काम भी कराया जा रहा है, लेकिन उन्हें इस काम के लिए न तो डाटा दिया जा रहा है न ही टैबलेट। ऐसे में उन्हें अपने खर्च और निजी संसाधनों से काम करना पड़ रहा है। वहीं, विभाग के रवैये से परेशान हेडमास्टरों ने विरोध का मन बनाया है। साथ ही शिक्षक संगठनों के माध्यम से अधिकारियों के सामने मांग रखने का मन बनाया है। दरअसल, विभाग ने करीब दो साल पहले हेडमास्टरों को टैबलेट देने की प्रक्रिया शुरू की थी। समय बीतने के साथ यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। जिसके बाद से उन पर खुद के खर्च पर विभागीय कार्य करने को कहा जा रहा है। आरोप है कि कुछ ब्लॉकों में पोर्टल पर कार्य पूरा न होने के कारण हेडमास्टरों का वेतन भी रोक दिया जाता है।
अभिभावकों की गलती से बढ़ी परेशानी
ऐसे हजारों आधार कार्ड हैं, जिनमें अभिभावकों ने जागरूकता के अभाव व अशिक्षा के चलते अपने बच्चे का नाम, पता व जन्मतिथि का गलत अंकन कराया है। स्कूलों के रिकॉर्ड आधार कार्ड से मेल न खाने के कारण शिक्षकों को बेहद परेशानी हो रही है।
शिक्षकों से उनके मोबाइल, लैपटॉप व डाटा से काम कराया जा रहा है। विभाग ने हेडमास्टरों को टैबलेट देने की बात कही थी, जो अब तक नहीं दिया गया है। संघ जल्द ही इस बारे में अधिकारियों से बात करेगा।
- सनत कुमार सिंह, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ
विभाग की ओर से अभी टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है, जिसकी वजह से टैबलेट मिलने में समय लग रहा है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रधानाध्यापकों को टैबलेट प्रदान किए जाएंगे।
- राकेश सिंह, बीएसए