निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद) के इकलौते विधायक विजय मिश्रा को राज्यसभा चुनाव में पार्टी की मंशा के विपरीत भाजपा के पक्ष में मतदान करने पर पार्टी से बाहर कर रास्ता दिखा दिया गया है।
इसके बाद पार्टी में सियासी घमासान बढ़ गया है। शनिवार को विधायक ने इस कार्रवाई को असंवैधानिक करार देते हुए विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि जो दल मान्यता प्राप्त ही नहीं है, उससे बिना व्हिप जारी किए निष्कासन कैसा।
ज्ञानपुर से चौथी बार विधायकी जीत कर विधानसभा पहुंचे विजय मिश्रा ने पिछली बार सपा से टिकट कटने के बाद निषाद पार्टी से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।
इसके बाद गोरखपुर और फूलपुर के लोस उपचुनाव में सपा से हाथ मिला चुकी निषाद पार्टी के इस फैसले से नाखुशी जताते हुए विजय मिश्रा ने राज्यसभा में बसपा के पक्ष में वोट देने के पार्टी के निर्देश को मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने भाजपा को वोट दे दिया। इसके बाद खलबली मच गई।
पार्टी की मंशा के विपरीत किया काम
एमएलए
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निषाद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने शनिवार को विजय मिश्रा को पार्टी से निष्कासित करने का एलान कर दिया। इसके बाद शाम को ज्ञानपुर जिला पंचायत सभागार में विजय मिश्रा ने इस निष्कासन को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि जिस दल को मान्यता ही नहीं है, वह क्रॉस वोटिंग का आरोप लगाकर निष्कासन कैसे कर सकता है।
मुलायम सिंह को फूलनदेवी और तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अखिलेश निषाद का हत्यारा बताकर जिस कैडर से विस चुनाव लड़ा, उन्हीं से हाथ मिलाकर गरीबों और कमजोरों को धोखा दिया है।
दूसरी ओर निषाद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने कहा कि उन्हें बसपा को वोट नहीं करना था तो बैठ जाते, लेकिन भाजपा को वोट देकर पार्टी की मंशा के विपरीत काम किया है।
अब कार्यकर्ताओं को धमकी जी जा रही है। मैंने गृह मंत्रालय, राज्यपाल सभी को पत्र लिखकर बता दिया है कि अगर पार्टी के किसी कार्यकर्ता पर हमला होता है, उसकी जिम्मेदारी विधायक विजय मिश्रा की होगी।