केंद्रीय जल संसाधन एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्री उमा भारती ने रविवार की शाम तीन साल में गंगा निर्मलीकरण का सपना साकार कर लेने का दावा किया। उन्होंने बताया कि गोमुख से गंगासागर तक गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने की कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। गंगा घाटों पर गंदगी न फैलने पाए इसके लिए टास्कफोर्स तैनात की जाएगी। निर्मलीकरण की तकनीक विकसित करने के लिए देश भर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और नदियों पर काम करने वाले विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।
सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी को सांसद चुनने वाला बनारस देश का केंद्र तो है ही, गंगा निर्मलीकरण का केंद्र भी इसे ही बनाना है। हमने पिछले 29 सालों की गंगा एक्शन प्लान की विफलता की समीक्षा करने के बाद तय किया है कि केंद्र जल शोधन इकाइयों का निर्माण अपने खर्च से कराएगा और उनके संचालन तथा निगरानी का भी पुख्ता बंदोबस्त किया जाएगा। इस काम में आईआईटी बीएचयू, रुड़की, खड़गपुर, पटना के साथ ही देश भर के तकनीकी संस्थानों की मदद ली जाएगी। ‘नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा’ के तहत गंगा तट पर कचरा, पॉलीथिन या किसी तरह की गंदगी रोकने के लिए टास्कफोर्स की तैनाती की जाएगी। नेहरू युवा केंद्र की मदद से गंगा सेवकों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा कचरा छानने वाली आधुनिक मशीनों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। गंगा को प्रदूषणमुक्त बनाने और पर्यावरणीय संतुलन के लिए तट पर पौधरोपण की भी योजना है। इनका असर साल के अंत तक दिखने लगेगा।
उन्होंने कहा कि गंगा में जो जीव-जंतु जहां रहते थे, वे तीन साल बाद वहां दिखाई देंगे। निर्मलीकरण का यही पैमाना सरकार ने तय किया है। गंगा को स्वच्छ रखने के जितने भी मॉडल हैं, हम उनका परीक्षण कर रहे हैं। वाराणसी में गंगा में गिरने वाले नालों को रोकने के लिए पर्यावरणविद प्रो. वीरभद्र मिश्र के निर्देशन में बनाए संकट मोचन फाउंडेशन के प्रस्ताव का भी अध्ययन किया जा रहा है। गंगा विश्वविद्यालय की स्थापना के सवाल पर उन्होंने कहा कि पीएम का संसदीय क्षेत्र होने की वजह से यहां गंगा पर बहुत कुछ किया जा रहा है। विश्वविद्यालय भी बनकर रहेगा। इससे पहले उन्होंने गंगा को नालामुक्त बनाने के अलावा निर्मलीकरण की दिशा में काम करने के लिए अफसरों के साथ बैठक की। देर शाम उमा ने अस्सी घाट पहुंचकर गंगा में बढ़ाव का भी जायजा लिया।