एनजीटी ने एनएमसीजी के बाढ़ क्षेत्र तय करने के पैमानों पर उठाए सवाल
इस पर एनजीटी ने कहा कि 2016 के गंगा पुनर्जीवन आदेश में सक्रिय बाढ़ क्षेत्र की कोई परिभाषा नहीं है। साथ ही 2016 के आदेश के खंड 3(I) के मुताबिक, बाढ़ क्षेत्र का निर्धारण 100 वर्षों में एक बार आने वाली सबसे ऊंची बाढ़ के स्तर के आधार पर होना चाहिए, जिसके आने की वार्षिक संभावना महज एक फीसदी होती है, न कि एनएमसीजी के यूपी सरकार को दिए मानदंडो के अनुसार, इसलिए उसे इसका स्पष्टीकरण देना होगा। एनजीटी ने यह भी कहा कि एनएमसीजी ने सीडब्ल्यूसी के जुलाई 2025 के दिशानिर्देशों का जिक्र, लेकिन दस्तावेज को रिकॉर्ड के तौर पर पेश नहीं किया, इसलिए एनएमसीजी के वकील को इन्हें पेश करने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया गया। इसके अलावा, एनजीटी ने अधिवक्ता तिवारी की मामले में जल शक्ति मंत्रालय और सीडब्ल्यूसी को पक्षकार बनाए जाने की अपील भी स्वीकार कर ली।