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एनजीटी के इस आदेश से सोनभद्र में मचा है हड़कंप, जानिए क्या है मामला

Thu, 19 Jul 2018 01:30 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र
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एनजीटी
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 ऊर्जा हब के रूप में ख्याति रखने वाले यूपी के सोनभद्र जिले में एनजीटी के एक आदेश ने खलबली मचा दी है।  बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र सहित जिले के सौ से अधिक खदानों को बंद करने के राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के आदेश से खनन क्षेत्र में हड़कंप मचा है। बंदी के आदेश को लेकर बुधवार को बिल्ली खनन क्षेत्र में अफरातफरी का माहौल रहा। 
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एनजीटी ने बिल्ली मारकुंडी सहित जिले के अन्य खनन क्षेत्र में मौजूद सौ से ज्यादा खनन पट्टों को अवैध मानते हुए उन्हें तत्काल प्रतिबंधित करने का आदेश दिया है। एनजीटी ने यह आदेश उच्चतम न्यायालय के गोवा फाउंडेशन वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया मामले में दिए गए आदेश के परिप्रेक्ष्य में दिया है।

13 जुलाई को दिए गए आदेश में बिल्ली मारकुंडी में डोलो स्टोन और लाइम स्टोन के 80 खनन पट्टों, बर्दिया और सिंदुरिया की 15 तथा कोटा, रेड़िया, गुरुदह, ससनई, करगरा, मीतापुर, बड़गवा एवं पटवध की 15 बालू खदानों को तत्काल बंद करने का आदेश दिया है।
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इस आदेश से प्रभावित पत्थर वाली कुल 118 खदानों में 42 खदानों की लीज अवधि पूरी हो चुकी है। इसके अलावा सलखन, बहुआर, दुगौलिया, हिनौती एवं जुलाली में सैंड स्टोन की खदानों को भी इको सेंसिटिव जोन के तहत कैमूर वन्य जीव प्रभाग में होने पर बंद करने का आदेश दिया है।

एनजीटी ने यूपी-एमपी सरकार से मांगा जवाब

एनजीटी
यूपी-एमपी के सीमांचल क्षेत्र (सिंगरौली परिक्षेत्र) में व्याप्त हर तरह के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पूर्व में दिए गए निर्देशों का अनुपालन नहीं करने पर अवमानना मानते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दोनों प्रदेशों के सरकारों से जवाब तलब किया है।

 मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी। एनजीटी ने सोनभद्र और सिंगरौली में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने में उदासीनता पर सख्ती जताई है। 
परिक्षेत्र में प्रदूषण एक बड़ी समस्या है। तमाम दावों के बाद भी कम होने के बजाए इसका दायरा बढ़ता जा रहा है।

इस मामले में इलाके में आबाद औद्योगिक संस्थानों व प्रदूषण पर निगरानी रखने वाली सरकारी एजेंसियों की गैर जिम्मेदारी उजागर होती रही है। प्रदूषण पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण  (एनजीटी) में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी दूबे द्वारा दायर याचिका पर बीते साल छह दिसंबर को एनजीटी ने संबंधित पक्षों को कई दिशा निर्देश जारी करते हुए आदेशों को कड़ाई से पालन कराने को कहा था, लेकिन जो कुछ होना चाहिए वह हुआ नहीं। इसे अवमानना बताते हुए दूबे ने एनजीटी में प्रकरण फाइल किया। इस मामले की सुनवाई 12 जुलाई को हुई। 
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खनन पट्टों के बंद होने से हजारों होंगे बेरोजगार

खदानों को बंद करने के आदेश से अफरातफरी - फोटो : अमर उजाला
एनजीटी के आदेश के पालन के बाद इन खदानों में कार्य करने वाले हजारों मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे। साथ ही इस व्यवसाय से जुड़े हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोग भी बुरी तरह से प्रभावित होंगे। प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा। 

भारी खर्च के बाद शुरू हुए खनन पट्टों के बंद करने के फरमान से खनन व्यवसाइयों में मायूसी देखने को मिल रही है। प्रदेश में नई सरकार के गठन होने के बाद से ही बंदी की कगार पर चल रहे खनन क्षेत्र में 2012 के बाद हुए नए खनन पट्टों को उच्च न्यायालय के बंदी के आदेश के बाद पहले ही दस हजार से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बेरोजगार हो चुके हैं।

अब एनजीटी के आदेश के बाद करीब 30 हजार मजदूरों को रोजगार देने वाले खनन क्षेत्र में लगातार गिर रहे गाज के कारण कई सामाजिक संकट पैदा होने की संभावना बन गयी है। एनजीटी ने बिल्ली मारकुंडी सहित जिले के अन्य खनन क्षेत्र में मौजूद सौ से ज्यादा खनन पट्टों को अवैध मानते हुए उन्हें तत्काल प्रतिबंधित करने का आदेश दिया है। इससे खनन क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति है। 

  इस आदेश से प्रभावित पत्थर वाली कुल 118 खदानों में 42 खदानों की लीज अवधि पूरी हो चुकी है। इसके अलावा सलखन, बहुआर, दुगौलिया, हिनौती एवं जुलाली में सैंड स्टोन की खदानों को भी इको सेंसटिव जोन के तहत कैमूर वन्य जीव प्रभाग में होने पर बंद करने का आदेश दिया है।
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