याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने बताया कि कंक्रीट निर्माण की तस्वीर शपथपत्र के साथ दाखिल होने के पर ट्रिब्यूनल ने टेंट कंपनियों से जवाब मांगा है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को तलब करते हुए पूछा है कि आखिर गंगा नदी तल में वर्जित पक्के निर्माण क्यों किए गए? एनजीटी ने यह भी पूछा है कि दोषियों पर अबतक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।