नए नोटिस की खबर फैलते ही क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। मस्जिद कमेटी के सदस्य और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में बाहर जुट गए। शाम 5.45 बजे रेलवे के अधिकारी आरपीएफ जवानों के साथ मौके पर पहुंचे और नए नोटिस को हटवा दिया।
आईडब्ल्यू विनय सिंह ने बताया कि नोटिस किसने लगाया इसकी जानकारी नहीं है। कहा कि रेलवे प्रशासन की ओर से पहले जारी किया गया नोटिस ही अधिकृत है। उधर, देर रात मुफ्ती-ए-शहर मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी इशां की नमाज पढ़ने मस्जिद पहुंचे। उन्होंने कहा कि इस मामले में रेलवे अधिकारियों से बात की जाएगी।
13 जून के नोटिस में क्या था खास
गंज शहीदा मस्जिद के बाहर 13 जून 2026 को रेलवे प्रशासन की ओर से चस्पा नोटिस में कहा गया था कि रेलवे भूमि पर अवैध रूप से मस्जिद का निर्माण किया गया है, जो स्टेशन के विकास कार्य में बाधा बन रहा है। नोटिस में कोर्ट के एक फैसले का जिक्र भी किया गया है। फैसले के आधार पर रेलवे प्रशासन ने उक्त भूमि पर बने मस्जिद हटाने का निर्णय लेने की बात नोटिस में लिखी थी।
मस्जिद प्रबंधन से 20 जून 2026 तक स्वयं निर्माण हटाने का अनुरोध किया गया था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय के बाद किसी भी दिन रेलवे प्रशासन ध्वस्तीकरण कर सकता है। नोटिस के सार्वजनिक होने के बाद मस्जिद कमेटी ने इसका विरोध किया था। कमेटी की ओर से रेलवे की नोटिस के नीचे अपनी आपत्ति संबंधी नोटिस भी चस्पा किया गया था। तब से मस्जिद को लेकर बहस और चर्चाओं का दौर जारी है।
यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आ गया जब सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने विरोध किया था। मस्जिद कमेटी ने उस दौरान स्पष्ट किया था कि मामले का समाधान कानूनी प्रक्रिया और स्थानीय स्तर पर ही किया जाएगा।