नई शिक्षा नीति के तहत सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में बदलाव की पहल
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नई शिक्षा नीति के तहत सरकारी स्कूलों में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। पठन पाठन की व्यवस्था में सुधार किया जा रहा है। वहीं, अब स्कूल कांप्लेक्स बनाने का फैसला लिया गया है। खासियत यह है कि यहां कई स्कूलों का एक ऐसा समूह होगा, जहां एक ही जगह इंटर तक की पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद, कौशल विकास के बारे में विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
कांप्लेक्स बनाने के लिए जगह के चयन सहित अन्य तैयारियां शुरू हो गई हैं। अब तक सरकारी स्कूलों में केवल आठ तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई होती थी। इसके बाद उन्हें दूसरी जगह जाना पड़ता था। नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों का एक समूह (स्कूल कांप्लेक्स) बनेगा। इसका उद्देश्य स्कूलों में मौजूद संसाधनों का अधिक से अधिक उपयोग करना है। +
इसका लाभ विद्यार्थियों को यह होगा कि उन्हें एक ही जगह सभी सुविधाएं मिल जाएंगी और भटकना नहीं पड़ेगा। साथ ही स्पेशल एजुकेशन जोन भी बनाया जाएगा, जहां शिक्षा से जुड़ी सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
पिछले सप्ताह रविवार को वाराणसी दौरे पर आए बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी ने अधिकारियों संग बैठक में जानकारी दी थी, जिसके बाद से बेसिक शिक्षा विभाग तैयारियों में लग गया है। बताया जा रहा है कि सबसे पहले प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र काशी में ही इसको तैयार कर मॉडल के रुप में प्रदर्शित करने की योजना है।
स्कूल कांप्लेक्स में एक प्रबंधन होने के चलते स्कूलों में पुस्तकालय, प्रयोगशाला, सोशल वर्कर, काउंसलर और विशेष विषयों के शिक्षकों की उपलब्धता जैसे संसाधन साझा किए जा सकेंगे। इसके अलावा स्कूलों में सामाजिक, बौद्धिक और स्वयंसेवी गतिविधियों को बढ़ावा देगा। स्कूलों में शिक्षा के साथ कौशल विकास से भी जुड़ी शिक्षा बच्चों को दी जाएंगी। जो उन्हें आगे चलकर फायदा पहुंचाएंगी।
क्या है कांप्लेक्स स्कूल
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश सिंह ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत तैयार होने वाले इस स्कूल कांप्लेक्स में कक्षा एक से 12 के स्कूलों को शामिल किया जाएगा। तीन से पांच किमी के अंदर स्कूलों को एक कांप्लेक्स में रखा जाएगा। इसके तहत आपस में शिक्षकों की सेवाओं का आदानप्रदान हो सकेगा। वहीं, स्कूल में उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग भी किया जा सकेगा। जैसे किसी एक स्कूल में खेल का मैदान है तो वहां अन्य स्कूलों के बच्चों को ले जाकर खेलने का मौका दिया जाएगा।