प्रधानाचार्य ने कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग युवाओं की एकाग्रता को प्रभावित कर रहा है। हर 20-30 सेकंड में बदलने वाले वीडियो दिमाग पर असर डालते हैं, जिसका नकारात्मक प्रभाव आने वाले वर्षों में स्पष्ट दिखाई देगा। उन्होंने छात्रों को सचेत करते हुए कहा कि यह आदत भविष्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश छात्र इंजीनियर, डॉक्टर या आईएएस बनने का सपना देखते हैं, लेकिन उनमें से बहुत कम ही अपने लक्ष्य तक पहुंच पाते हैं। इसका मुख्य कारण आत्मविश्वास की कमी और तैयारी में निरंतरता का अभाव है।
कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने इसे बेहद उपयोगी और प्रेरणादायक बताया। विद्यालय प्रशासन ने भी ऐसे कार्यक्रमों को भविष्य में जारी रखने की बात कही, ताकि विद्यार्थियों को सही दिशा मिल सके और वे अपने लक्ष्य के प्रति गंभीर होकर आगे बढ़ सकें।