पशुपतेश्वरनाथ मंदिर में लगा नेपाल का पोस्टर।
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नेताओं ने नेपाल को बर्बाद किया, सत्ता पटल जरूरी था
बनारस में रहने वाले नेपाली मूल के दुर्गा प्रसाद अधिकारी ने कहा कि नेपाल में परिवर्तन बहुत जरूरी था। युवाओं में इसकी सुगबुगाहट काफी पहले से चल रही थी। यह हिंसा केपी सरकार की नादानी और तानाशाही का परिणाम है। नेपाल के किसान, दलित, आमजनता पर तमाम तरह के टैक्स लगाकर उन्हें आहत किया जा रहा था। नेपाल का युवा बेरोजगारी से भी जूझ रहा है। यही कारण है कि वह अपना घर-मकान बेचकर जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा या अन्य देशों में जाकर रोजगार ढूंढ रहा है।
नेपाल और नेपाली समाज को करीब से जानने वाले बनारस के प्रो. सुरेंद्र प्रताप ने नेपाल हिंसा पर अपनी चिंता जताई। कहा कि काशी और नेपाल के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है। हिंदुस्तान का धार्मिक रिश्ता है। उत्तर प्रदेश-बिहार की सीमा पर बसे मद्धेशिया समाज के लोगों का इसमें काफी दखल है। बीपी कोईराला के पिताजी कैंट स्टेशन पर अखबार पर सोते थे, फिर धीरे-धीरे न्यूजपेपर बांटने भी लगे। बिशेश्वर प्रसाद कोईराला की पैदाइश यहीं सारनाथ में हुई।